नई दिल्ली। इशरत जहां मुठभेड़ मामले में आईबी के चारों अफसर मुकदमे से बच सकते हैं। स्पष्ट संकेत हैं कि गृह मंत्रालय आईबी अधिकारियों पर केस चलाने की सीबीआइ की मांग को गृह मंत्रालय खारिज सकता है।

इशरत जहां मामले में सीबीआई ने आइबी के सेवानिवृत्त विशेष निदेशक राजिंदर कुमार समेत तीन अन्य अफसरों पी मित्तल, एमके सिन्हा और राजीव वानखेड़े के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए गृह मंत्रालय से मंजूरी मांगी है। लेकिन माना जा रहा है कि मंत्रालय मंजूरी देने से इन्कार कर सकता है।

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सीबीआई द्वारा मुहैया कराए गए दस्तावेजों की पूरी पड़ताल के बाद ही मंजूरी देने के मुद्दे पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। आइबी के अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से पहले मंत्रालय ने जांच एजेंसी से केस डायरी और पुलिस अधीक्षक की अंतिम रिपोर्ट तलब की थी। इसके बाद सीबीआई ने आरोपियों और गवाहों के बयान के अलावा अन्य जरूरी दस्तावेज गृह मंत्रालय को सौंपे हैं।

हालांकि, जांच एजेंसी ने ये दस्तावेज गुजरात सरकार से साझा करने से इन्कार कर दिया। गृह मंत्रालय ने कहा था कि आईबी अफसरों के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी दस्तावेजों की समीक्षा किए बगैर नहीं दी जा सकती। इशरत जहां समेत तीन अन्य को अहमदाबाद में जून, 2004 को कथित रूप से एक फर्जी मुठभेड़ में मार दिया गया था।

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