दरभंगा। अपने बीमार पिता को साइकिल पर बिठाकर 12 सौ किलोमीटर का सफर तय करने वाली बिहार के दरभंगा की रहने वाली ज्योति की शोहरत सात समंदर पार विदेशों तक में हो गई है। अपनीन हिम्मत और हौंसलो के बल पर अखबार से लेकर सोशल मीडिया तक की सुर्खियों में रहने वाली ज्योति के चर्चे अब यूरोप और अमेरिका में हो रहे हैं। इन साधन-संपन्न देशों में ज्योति की हिम्मत की दाद दी जा रही है और उसको अब बेहतर जीवन की पेशकश भी की जा रही है।

दरभंगा के सिरहुल्ली गांव की रहने वाली ज्योति लॉकडाउन के दौरान अपने बीमार पिता को साइकिल पर बिठाकर गुड़गांव से दरभंगा पहुंच गई। जब ज्योति के बुलंद हौंसलों की दास्तान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप ने पढ़ी तो उन्होंने इसकी काफी सराहना की। एचटी मीडिया समूह की वेबसाइट लाइव मिंट पर चल रही ज्योति की दास्तान को शुक्रवार को इवांका ट्रम्प ने ट्विटर पर साझा किया। मीडिया में ज्योति की कहानी सामने आने के बाद कई लोग और संगठन उसकी मदद को आगे आए हैं। ज्योति फिलहाल आठवीं कक्षा में पढ़ रही है इसलिए कई संगठनों ने उसको पढ़ाई में मदद का आश्वासन दिया है।

ज्योति के लंबे साइकिल के सफर को देखते हुए साइकिलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने ज्योति को अगले महीने ट्रायल के लिए भी बुलाया है। इस संबंध में ज्योति ने बताया कि शुक्रवार उसके पास एक कॉल आया है। इसमें साइकिलिंग फेडरेशन के चेयरमैन ओंकार सिंह ने उसको शाबाशी के साथ आशीर्वाद भी दिया। इस बीच शुक्रवार को राढ़ी पश्चिमी पंचायत के पकटोला स्थित डॉ. गोविंद चंद्र मिश्रा एजुकेशनल फाउंडेशन ने भी ज्योति को मुफ्त शिक्षा और उसके पिता मोहन पासवान को नौकरी का प्रस्ताव दिया है। फाउंडेशन ने सिरहुल्ली निवासी मोहन पासवान और उनकी पुत्री ज्योति कुमारी को हरसंभव सहायता करने का फैसला किया है।

8 दिनों में किया 1200 किलोमीटर का सफर तय

दरभंगा सिरहुल्ली गांव की रहने वाली 15 साल की ज्योति जनवरी में अपने बीमार पिता की सेवा करने के लिए गुड़गांव गई थी। इसी दौरान मार्च में लॉकडाउन हो गया और वह गुड़गांव में ही फंस गई। बीमार पिता के पास पैसे नहीं थे, इसलिए पिता और बेटी के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया। इसी बीच प्रधानमंत्री राहत कोष से एक हजार रुपये उनके खाते में आए। ज्येाति ने कुछ और पैसे मिलाकर अक पुरानी साइकिल खरीदी और पिता को उस पर बिठाकर गांव तक का सफर तय करने का फैसला कर लिया। पिता ने पहले तो इंकार किया, लेकिन बेटी के हौसेले देखकर उन्होंने अनुमति दे दी। ज्योति आठ दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद 12 सौ किलोमीटर साइकिल चलाकर अपने पिता को लेकर गुड़गांव से दरभंगा के सिरहुल्ली गांव पहुंच गई।

Posted By: Yogendra Sharma

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