Fact Check: इस वर्ष 30 अगस्त (रविवार) को पूरे देश में जन्माष्टमी का पर्व मनाया गया। इस दौरान भगवान कृष्ण की आरती-पूजा और जुलूस के वीडियो वायरल हुए। जुलूस के ऐसे ही एक वीडियो को कश्मीर का बताया गया और दावा किया गया कि 32 साल बाद श्रीनगर में जन्माष्टमी का जुलूस निकला है। वीडियो पर कई वेबसाइट्स ने खबर बनाई और नामी हस्तियों ने इसे इंटरनेट मीडिया पर शेयर किया। वीडियो के साथ लिखा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज में ही यह संभव हो सका है। ताजा खबर यह है कि 32 साल बाद कश्मीर में इस तरह जन्माष्टमी आयोजन का दावा गलत है। पड़ताल में पता चला है कि 2004 से वहां ऐसा आयोजन हो रहा है। स्थानीय लोगों ने भी ग्रेटर कश्मीर अखबार को बताया है कि श्रीनगर के लालचौक पर ऐसा आयोजन सालों से हो रहा है। हिंदुस्तान टाइम्स ने 2007 में लिखा था, '1989 में कश्मीर में आतंकवाद की शुरुआत होने के बाद से पहली बार ऐतिहासिक लाल चौक से जन्माष्टमी का जुलूस निकला।' कुल मिलाकर यहां जन्माष्टमी का जुलूस पहली बार नहीं निकला है, बल्कि वर्षों से यह क्रम जारी है।

वीडियो में किया गया था यह दावा

जन्माष्टमी के अगले दिन यानी सोमवार को खबर आई कि कश्मीर में 32 सालों बाद एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। वीडियो के साथ रिपोर्ट्स में कहा गया, 'कश्मीरी पंडितों द्वारा यहां जन्माष्टमी के अवसर पर भव्य आयोजन किया गया। श्री नगर में कड़ी सुरक्षा के बीच भगवान श्री कृष्ण जी का जन्मदिन मनाने के लिए जन्माष्टमी जुलूस निकाला गया। कश्मीरी पंडितों ने शहर के हब्बा कदल इलाके में गणपतियार मंदिर से ‘झांकी’ जुलूस शुरू किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों का हवाला देते हुए बताया कि ‘‘यात्रा ने शहर के क्रालखुद, बरबरशाह, अमीरकदल पुल और जहांगीर चौक सहित प्रमुख स्थानों को कवर किया।'

(पहले उपलब्ध जानकारी के हिसाब से खबर तैयार की गई थी। उक्त सूचनाएं गलत निकनी, जिसके बाद नए तथ्यों के साथ इस खबर को अपडेट किया गया है।)

Posted By: Arvind Dubey

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