लखनऊ। 1984 की बैच के आईपीएस अधिकारी जावीद अहमद को यूपी का नया डीजीपी बना दिया गया है और उन्‍होंने शुक्रवार को अपना पदभार भी संभाल लिया। उत्तर प्रदेश पुलिस के नवनियुक्त महानिदेशक जावीद अहमद की प्राथमिकता लोगों में उत्तर प्रदेश पुलिस की विश्वसनयता बढ़ाना है।

डीजी रेलवे के पद पर कार्यरत सैयद जावीद अहमद ने दिन में करीब 12 बजे कार्यभार संभालने के बाद कहा कि लोगों में उत्तर प्रदेश पुलिस की विश्वसनीयता बढ़ाना ही उनकी प्राथमिकता है। वह इसके लिए आज से ही काम शुरू कर देंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की हीलाहवाली करने वाले बर्दाश्त नहीं होंगे।

प्रदेश के शहरों का ट्रैफिक मैनेजमेंट ठीक करना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने बड़ी जिम्मेदारी दी है। अब पुलिस की छवि को सुधारा जाएगा। महिलाओं को सुरक्षा के साथ कानूनराज सुनिश्चित करना होगा। यह जरूरी है कि सूबे की पुलिस अच्छा काम करने के साथ ही अपनी अच्छाई सामने लाए। पुलिस के सामने काफी बड़ी चुनौतियां हैं। उत्तर प्रदेश विशाल राज्य है, जहां पर सांप्रदायिकता समेत कई चुनौतियां है।

नये वर्ष के पहले दिन 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी जावीद अहमद के नाम पर आज मुहर लगी। मूलत: पटना के सैयद जावीद अहमद बीते वर्ष 30 जून को महानिदेशक पद पर प्रोन्नत हुए थे। जावीद अहमद इतिहास में परास्नातक हैं। वह लंबे समय तक दिल्ली व लखनऊ में सीबीआई में भी तैनात रहे हैं।

जावीद अहमद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के करीब साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल के आठवें पुलिस प्रमुख बने हैं। जावीद अहमद इससे पहले डीजी रेलवे पद पर तैनात थे। उनको प्रदेश के पुलिस प्रमुख की दौड़ में माना जा रहा था। उनकी सेवानिवृति 31 मार्ज 2020 में होनी है। माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार उनको दो वर्ष तक अपना कार्य करने का मौका भी मिलेगा।

वर्तमान समय में प्रदेश में डीजी के पद पर 14 आइपीएस कार्यरत है। जावीद अहमद के साथ ही प्रवीण सिंह व वीके गुप्ता इस दौड़ में आगे माने जा रहे थे।

जावीद की छवि साफ सुथरी है। मौजूदा सरकार द्वारा नियुक्त किये गये वह आठवें डीजीपी हैं और सत्ता प्रतिष्ठान के करीबी समझे जाते हैं। प्रमुख सचिव गृह देबाशीष पंडा ने आज जावीद अहमद के डीजीपी बनाये जाने का आदेश जारी किया। इसी के साथ पुलिस विभाग के मुखिया को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया।

गुरुवार को ही जगमोहन यादव की विदाई के बाद से डीजीपी की तैनाती को लेकर सरकार की ओर लोगों की निगाहें लगी थी। रेस में कई प्रभावशाली अफसरों के शामिल होने से कुछ भी साफ नहीं था। 30 जून 2015 को डीजी पद पर प्रोन्नति पाने के साथ ही जावीद अहमद का नाम भी डीजीपी के लिए तेजी से चल पड़ा था। मूलत: बिहार के पटना निवासी जावीद इतिहास विषय में परास्नातक हैं।

13 आइपीएस अफसरों को सुपरसीड कर बने डीजीपी

डीजीपी पद के लिए 1979 बैच के रंजन द्विवेदी से लेकर 1984 बैच के डॉ. हरिश्चन्द्र सिंह समेत कई अफसरों का नाम चर्चा में था लेकिन सफल जावीद अहमद को मिली। जावीद ने अपने से वरिष्ठ उत्तर प्रदेश कैडर के 13 आइपीएस अफसरों को सुपरसीड किया है।

रंजन द्विवेदी, सुलखान सिंह, मलय कुमार सिन्हा, विजय सिंह, विजय कुमार गुप्ता, प्रवीण सिंह, डॉ. सूर्य कुमार, आरआर भटनागर, गोपाल गुप्ता, ओपी सिंह, रामनारायण सिंह, डॉ. हरिश्चन्द्र सिंह और रजनीकांत मिश्रा जावीद से वरिष्ठ हैं। इनमें मलय कुमार सिन्हा, आरआर भटनागर, ओपी सिंह और रजनीकांत मिश्र केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं।

सुप्रीम कोर्ट की कसौटी पर खरे

शीर्ष अदालत की गाइड लाइन है कि डीजीपी का कार्यकाल दो वर्ष का होना चाहिए। इस कसौटी पर जावीद अहमद उपयुक्त हैं। जावीद का कार्यकाल 31 मार्च 2020 तक है। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश था कि तीन सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से उनके रिकॉर्ड को देखते हुए डीजीपी का चयन किया जाये।

किसी ने पूरा नहीं किया दो वर्ष का कार्यकाल

शीर्ष अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद 2013 से ही प्रदेश का कोई भी डीजीपी दो वर्ष का कार्यकाल नहीं पूर्ण कर सका। इस सरकार के कार्यकाल में डीजीपी पद पर नियुक्त किए गए एसी शर्मा, देवराज नागर, रिजवान अहमद, आनंद लाल बनर्जी, अरुण कुमार गुप्ता, अरविंद कुमार जैन और जगमोहन यादव का कार्यकाल क्रमश: करीब एक वर्ष, साढे आठ महीने, दो महीने, दस महीने, एक महीने, पांच महीने और छह माह का ही रहा।

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