नई दिल्ली, एजेंसी। जेट एयरवेज बेंगलूर से एक व्यक्ति के पोर्ट ब्लेयर तक के सफर के दौरान अंतिम संस्कार करने के लिए उसके पिता का ताबूत ले जाना भूल गई जिसपर शीर्ष उपभोक्ता आयोग ने उसे उस व्यक्ति को 2.45 लाख रूपए अदा करने के निर्देश दिए।

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह राज्य आयोग के फैसले के खिलाफ एयरलाइन की याचिका खारिज कर दी जिसने एयरलाइन को मानसिक परेशानी पहुंचाने और त्रुटिपूर्ण सेवा पहुंचाने पर शिकायतकर्ता को यह रकम अदा करने के निर्देश दिए। ताबूत समय पर नहीं पहुंचने पर अंतिम संस्कार एक दिन विलंब से किया गया।

न्यायमूर्ति डी. के. जैन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘‘ (एयरलाइन) की दलील है कि ऐसी गलती मानवीय भूल की वजह से हूई ‘जो कभी कभी हो जाती है।’ हम यह समझने में असमर्थ हैं कि कैसे विमान में 100 किलोग्राम वजन का कोई पैकेज अनछुआ रह जाएगा जबकि यह माना गया है कि बेंगलूर से चली उड़ान चेन्नई में समाप्त हो गई और पोर्ट ब्लेयर जा रहे सभी यात्रियों को आगे की यात्रा के लिए दूसरे विमान पर सवार होना था।’’

पीठ ने कहा कि 100 किलोग्राम का कोई पैकेज कहीं दबा नहीं रह सकता कि वह स्टाफ की निगाहों में नहीं आ सका।

पीठ ने कहा, ‘‘हमें राज्य आयोग के इस निष्कर्ष पर सहमति जताने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि यह एयरलाइन्स की तरफ से लापरवाही और सेवा में त्रुटि का एक मामला है।’’