देश में अक्सर चुनाव में खड़े होने वाले नेताओं और सरकार में शामिल मंत्रियों के शिक्षा के स्तर को लेकर बहस होती रहती है। कई बार मांग उठी है कि चुनाव लड़ने के लिए शिक्षा का स्तर भी तय किया जाए लेकिन अब तक ऐसा संभव नहीं हो पाया है। हालांकि, कुछ नेता हैं जो इसे गंभीरता से लेते हैं और ऐसे ही एक नेताजी है झारखंड के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो। ऐसा नहीं है कि वो शिक्षित नहीं है लेकिन केवल मैट्रिक पास होने की वजह से उन्हें अक्सर लोगों और विरोधियों के व्यंग्य बाण झेलने पड़ते थे।

इसके बाद अब मैट्रिक पास शिक्षा मंत्री ने अपनी योग्यता बढ़ाने की ठानी है। मंत्री जी ने अब 12वीं कक्षा में एडमिशन लिया है। उन्होंने सोमवार को खुद के स्थापित देवी महतो स्मारक इंटर महाविद्यालय नावाडीह में इंटर में अपना नामांकन कराया।

53 वर्षीय शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो सोमवार दोपहर एक बजे जब लाव लश्कर के साथ बोकारो स्थित कॉलेज पहुंचे तो लोगों को लगा कि पूर्व की भांति वे खुद के स्थापित इंटर महाविद्यालय का जायजा लेने आए हैं। कॉलेज में मंत्री सबसे पहले फीस काउंटर पहुंचे और इंटरमीडिएट में नामांकन कराने के लिए बतौर शुल्क के रूप में 1100 रुपये जमा कर रसीद कटाई। रसीद देख लोग हतप्रभ रह गए। लोगों को अचरज में देख मंत्री ने कहा, पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती है। कसक थी कि आगे नहीं पढ़ पाया, अब कसक दूर करूंगा।

बताया कि नेहरू उच्च विद्यालय तेलो में नामांकन कराकर वर्ष-1995 में मैट्रिक की परीक्षा दी थी तब भी लोग चौंके थे। उस दौरान मेरी उम्र 28 वर्ष थी। इससे पहले वो नौवीं तक की ही पढ़ाई पूरी कर स्कूल से ड्रॉपआउट हो गए थे। जब झामुमो के संस्थापक बिनोद बिहारी के साथ झारखंड अलग राज्य के आंदोलन में कूदे तब उनके "पढ़ो व लड़ो" के नारे से प्रभावित हुए और मैट्रिक की परीक्षा दी। इसमें द्वितीय श्रेणी से पास हुए। बाद में कई वजहों से वे आगे की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए। अब जब झारखंड के शिक्षा मंत्री हैं तो न सिर्फ राज्य के सभी बच्चों को पढ़ाएंगे बल्कि खुद भी पढ़ेंगे, यह ठान लिया है। मंत्री ने जिस इंटर महाविद्यालय में नामांकन कराया है, उसकी स्थापना वर्ष 2006 में उन्होंने खुद कराई थी। तब वे डुमरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक थे।

निजी कॉलेज में नामांकन कराए जाने पर सवाल

भाजपा नेता सह बोकारो जिला मुखिया संघ के महासचिव गौरीशंकर महतो ने शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो के निजी कॉलेज में नामांकन कराए जाने पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री एक ओर जहां सरकारी विद्यालय को बढ़ावा देने के लिए सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले को ही सरकारी नौकरी देने की वकालत करते हैं। वहीं, दूसरी तरफ खुद निजी कॉलेज में नामांकन कराकर निजी शैक्षणिक संस्थान में पढ़ाई करने को बढ़ावा दे रहे हैं।

कम से कम स्नातक रहे हैं पूर्व के शिक्षा मंत्री

जगरनाथ महतो से पूर्व राज्य में छह शिक्षा मंत्री रहे हैं। किसी की भी डिग्री स्नातक से कम नहीं रही है। यह पहली बार है जब किसी मैट्रिक पास को राज्य के शिक्षा मंत्री का दायित्व दिया गया है।

शिक्षा मंत्री : डिग्री

नीरा यादव : पीएचडी

बैद्यनाथ राम : स्नातक

हेमलाल मुर्मू : स्नातक

बंधु तिर्की : स्नातक

प्रदीप यादव : स्नातक

चंद्रमोहन प्रसाद : स्नातक प्रोफेशनल

Posted By: Ajay Kumar Barve

Assembly elections 2021
elections 2022
  • Font Size
  • Close