उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के ग्राम कन्हऊ में पंचायत भवन निर्माण के लिए नीव की खुदाई के दौरान फावड़ा लगने से चांदी-तांबे के सिक्कों से भरा चांदी का कलश फूट गया। सिक्के देख मजदूरों में लूट मच गई। छीना-झपटी में एक मजदूर अपने पिता की मदद से सिक्कों से भरा कलश लेकर भाग गया। प्रधान की सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल पर मिले सिक्के कब्जे में लिए। कलश लेकर भागे मजदूर व उसके पिता की तलाश की जा रही है। मिले सिक्कों पर महारानी विक्टोरिया की तस्वीर होने से ये ब्रिटिशकालीन होने का अनुमान लगाया जा रहा है। एसडीएम सफीपुर राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि चांदी के 17 और तांबे के 287 सिक्के मिले हैं। डीएम को जानकारी दे दी गई है। उनके निर्देशानुसार सिक्के पुरातत्व विभाग भेजेंगे।

देश के इन दो मंदिरों भी हैं खजाना

खजाने की बात सामने आते ही दो मंदिरों के खजाने सामने आते हैं। ये हैं पद्मनाथ स्वामी मंदिर और ओडिशा का जगन्नाथ मंदिर। जगन्नाथ मंदिर के रत्न खजाने को लेकर नवंबर 2019 में ओडिशा सरकार ने कहा था कि उसके पास पुरी स्थित श्रीमंदिर के रत्नभंडार को खोलने का वर्तमान में कोई प्रस्ताव नहीं है। विधानसभा में सवाल उठाया गया था कि श्रीजगन्नाथ रत्न भंडार को अंतिम बार कब खोला गया था और उस समय रत्न भंडार में कौन कौन से थे। रत्न भंडार खोलकर रत्नों की पहचान करने के लिए फिलहाल प्रस्ताव होने के बावजूद यह किस वजह से नहीं खोला जा रहा है। अंतिम बार जिन बेशकीमती रत्नों की गिनती हुई थी, वह सुरक्षित हैं या नहीं।

वहीं केरल के पद्मनाभ स्वामी मंदिर में कहा जाता है कि करीब 2 लाख करोड़ का खजाना है, लेकिन जानकारों का कहना है कि अमूल्य खजाने का वास्तविक मूल्य इससे कई गुना ज्यादा है। मान्यता है कि मंदिर की स्थापना आज से 5 हजार साल पहले की गई थी। भगवान विष्णु को समर्पित मंदिर का पुनर्निमाण छठी सदी में त्रावनकोर के महाराज ने करवाया था और अपने खजाने को इस मंदिर में सुरक्षित रखवाया था।

Posted By: Arvind Dubey

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Makar Sankranti
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