लखनऊ। कमलेश तिवारी हत्याकांड के पीछे आईएस (इस्लामिक स्टेट) का कनेक्शन दरकिनार नहीं किया जा सकता। गुजरात में करीब एक साल पहले पकड़े गए आतंकी संगठन आईएस के आतंकी मु.उबैद मिर्जा और कासिम ने पूछताछ में कई राज उगले थे। गुजरात एटीएस ने मई 2018 में दोनों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था, जिसमें उनके द्वारा कमलेश तिवारी की हत्या की साजिश रचे जाने का भी जिक्र किया था। चार्जशीट में उबैद मिर्जा के एक वीडियो का भी हवाला दिया गया था, जिसमें वह लखनऊ के कमलेश तिवारी की हत्या करने की बात कह रहा था। एक अंग्रेजी अखबार में इन तथ्यों के आधार पर एक खबर के प्रकाशित होने पर 13 अक्टूबर 2019 को कमलेश तिवारी ने एक ट्वीट किया था, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, एडीजी जोन लखनऊ और एसएसपी को टैग किया गया था। ट्वीट में कमलेश ने उनके खिलाफ बड़ी साजिश के बावजूद उनकी सुरक्षा बढ़ाने के आवेदन पर कोई निर्णय न लिये जाने पर नाराजगी जताई थी।

दरअसल, कमलेश तिवारी के घर पर मिठाई के जिस डिब्बे में रखकर चाकू और पिस्टल ले जाई गई थी, वह मिठाई 16 अक्टूबर की रात 9:30 बजे के करीब सूरत के उद्योगनगर उधना स्थित धरती फूड प्रोडक्ट प्रा. लि. से खरीदा गया था। डिब्बे में 680 रुपये प्रति किलोग्राम वाली 750 ग्राम पिस्ता घारी 530 रुपये देकर खरीदी गई थी। मिठाई का डिब्बा गुजरात की एक दुकान का होना महज इत्तफाक है, यह फिर किसी गहरी साजिश की ओर इशारा कर रही है। इसको लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। पिछले दिनों नेपाल के रास्ते कुछ आतंकियों के देश के सीमा में घुसने की बात भी सामने आई है। इन परिस्थितियों में हिदूवादी नेता की हत्या के पीछे किसी साजिश को नकारा नहीं जा सकता है।

विवादित टिप्पणी करने के मामले में कमलेश पर एनएसए के तहत कार्रवाई की गई थी। इस मामले में जेल से छूटने के बाद कमलेश की सुरक्षा में दो गनर तैनात किए गये थे और घर की सुरक्षा में आठ पुलिसकर्मी लगाए गये थे। 2017 में घर की सुरक्षा मे लगे पुलिसकर्मियों को हटा लिया गया था। इसके साथ ही कमलेश का एक गनर भी कम कर दिया गया था। कमलेश ने 27 जून को भी अपनी सुरक्षा बढ़ाने के लिए डीएम आवास के सामने प्रदर्शन किया था। पिछले महीने ही कमलेश तिवारी ने इस संबंध में डीएम और एसएसपी को आवेदन दिया था।

सूरत से 16 अक्टूबर की रात 9:30 बजे मिठाई खरीदने के बाद हत्यारों के विमान से लखनऊ आने की आशंका जताई जा रही है। क्योंकि सूरत से लखनऊ के लिए 17 अक्टूबर की सुबह तीन बजे केवल एक ही ट्रेन 19037 अवध एक्सप्रेस थी। जो कि टूंडला की नॉन इंटरलाकिंग के डायवर्जन के कारण बदले रूट से शुक्रवार दोपहर तीन बजे पहुंच सकी थी। ऐसे में हत्यारों के अहमदाबाद जाकर सीधे विमान से लखनऊ आने की आशंका जताई जा रही है।

Posted By: Yogendra Sharma