नई दिल्ली। सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव ने जहां आखिरी सांस ली थी, उस करतारपुर साहिब में अब तक करीब 45 हजार श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। यह जानकारी एक सवाल के जवाब में लिखित तौर पर दी गई। करतारपुर कॉरिडोर के जरिये पाकिस्तान के करतारपुर साहिब गुरुद्वारे में श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए कुल 44,951 तीर्थयात्रियों अब तक वहां जा चुके हैं। बताते चलें कि नवंबर 2019 में इस कॉरिडोर को खोला गया था।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि डेरा बाबा नानक में एक अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड पैसेंजर टर्मिनल बिल्डिंग और डेरा बाबा नानक से अंतर्राष्ट्रीय सीमा तक एक चार लेन का राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-354B) बनाया गया है। इसके जरिये वर्ष भर तीर्थयात्रियों को सुगम और आसान रास्ता मिलता है।

उन्होंने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि करतारपुर साहिब में श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए करतारपुर गलियारे के माध्यम से 9 नवंबर 2019 से 31 जनवरी 2020 तक कुल 44,951 तीर्थ यात्रियों ने यात्रा की। इसके अलावा रेड्डी ने बताया कि इमिग्रेशन अधिकारियों के द्वारा तीर्थयात्रियों के पासपोर्ट पर मुहर नहीं लगाई जा रही है और भारत सरकार ने पाकिस्तान सरकार से बार-बार आग्रह किया है कि वह तीर्थयात्रियों पर कोई शुल्क न लगाए। करतारपुर साहिब जाने वाले प्रत्येक तीर्थयात्री से पाकिस्तान 20 डॉलर (करीब 1400 रुपए) की फीस लेता है।

बताते चलें कि करतारपुर गलियारा भारतीय सिख श्रद्धालुओं को पाकिस्तान में नारोवाल के करतापुर में पवित्र गुरुद्वारा दरबार साहिब पहुंचने के लिए सबसे छोटा मार्ग उपलब्ध कराता है। यहां गुरुनानक देव ने अपने जीवन के अंतिम 18 साल गुजारे थे। गुरुनानक देव ने 1504 में रावी नदी के तट पर करतारपुर में सबसे पहले सिख समुदाय को बसाया था।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

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