नई दिल्ली। सिखों के दो अहम गुरुद्वारों को जोड़ने वाले करतारपुर कॉरिडोर को खोलने के पीछे पाकिस्तान की परदे के पीछे छिपी असलियत लगभाग साफ हो गई है। पाकिस्तान के ही एक वरिष्ठ मंत्री ने शनिवार को दावा किया कि करतारपुर कॉरिडोर सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के दिमाग की उपज है और यह भारत को बड़ी दिक्कत देगा। अब तक यह बात कही जा रही है कि सिखों की भावनाओं के सम्मान में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस कॉरिडोर को खोलने का फैसला किया था। हालांकि, सत्ता संभालने के कुछ ही हफ्ते बाद जब पीएम इमरान खान ने अचानक करतारपुर कॉरिडोर खोलने की बात कही थी, तभी भारत की सुरक्षा एजेंसियों और सुरक्षा विशेषज्ञों के पड़ोसी देश की इस दरियादिली को लेकर चौकन्ने हो गए थे। अब पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख राशिद के इस बयान ने इस शंका को और दृड़ किया है। इमरान खान कैबिनेट के बड़बोले मंत्री राशिद ने कहा है कि करतारपुर गलियारा जनरल बाजवा के दिमाग की उपज है और भारत को इसका खामियाजा लंबे समय तक भुगतना पड़ेगा। अब यह साफ है कि राशिद ने इस बयान से परोक्ष तौर पर करतारपुर कॉरिडोर को पंजाब में अलगाववादी और आतंकवादी गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की है।

रेल मंत्री राशिद पहले भी अपने भारत विरोधी बयानों के लिए पहचाने जाते हैं और अपने बयानों से कई बार इमरान खान सरकार की भी किरकिरी कराते रहे हैं। अपने इस बयान से एक तरफ तो उन्होंने अपने पीएम इमरान खान को भी झूठा बता दिया जो करतारपुर गलियारे का श्रेय स्वयं ले चुके हैं। उनके इस बयान से सरकार की भी किरकिरी हुई है, क्योंकि सरकार इस गलियारे को खोलने का पूरा श्रेय पीएम इमरान खान को देती है। लेकिन मंत्री राशिद ने करतारपुर गलियारे का पूरा श्रेय जनरल बाजवा को दे दिया है। नौ नवंबर को ही एक भव्य कार्यक्रम आयोजित कर पीएम खान ने भारत से आमंत्रित कई गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हुए करतारपुर गलियारे का उद्घाटन किया था। रेल मंत्री राशिद ने कहा है कि, 'करतारपुर बार्डर को खोल कर जनरल बाजवा ने भारत को जो घाव दिया है वह उसको लंबे समय तक याद रखेगा। जनरल बाजवा ने भारत को जबरदस्त धक्का दिया है। पाकिस्तान ने शांति के लिए नया माहौल बनाया है और सिख समुदाय का इससे भरोसा भी जीता है।'

सुप्रीम कोर्ट ने सेवानिवृत्त हो रहे पाक सेना के प्रमुख जनरल बाजवा के कार्यकाल को तीन साल तक बढ़ाने के इमरान सरकार के फैसले को खारिज कर दिया था। अदालत ने कुछ शर्तों के साथ बाजवा को सिर्फ छह महीने का सेवा विस्तार दिया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से पड़ोसी देश के राजनीतिक तापमान में इजाफा हुआ है। ऐसे में हो सकता है कि राशिद सेना को खुश करने के लिए इस तरह की बयानबाजी कर रहे हों, क्योंकि वह कोई कद्दावार नेता नहीं हैं। हालांकि इस चक्कर में उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से खालिस्तान आतंकवाद की तरफ इशारा कर दिया है। ऐसा नहीं है कि भारत करतारपुर कारीडोर से खालिस्तान आतंकवाद के नए सिरे से शुरु होने के खतरे को लेकर पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए है।

पूर्व में पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह स्वयं यह बात कह चुके हैं। कॉरिडोर को लेकर पाकिस्तान के साथ जब भारत के विदेश व गृह मंत्रालय के अधिकारियों की चर्चा शुरू हुई तब ही भारत ने इस बात का स्पष्ट तौर पर जिक्र किया था। दोनों देशों के बीच हुए समझौते में इस बात को शामिल किया गया है कि वहां जाने वाले धार्मिक यात्रियों की भावनाओं को भड़काने या भारत विरोधी गतिविधियों का कोई काम नहीं होगा। लेकिन पहले दिन जब भारतीय यात्रियों का जत्था वहां पहुंचा तो वहां कुछ खालिस्तान संबंधी कुछ पोस्टर थे जिसे बाद में हटा दिया गया था। इसी तरह से करतारपुर गलियारे के प्रचार के लिए पाकिस्तान सरकार ने जो प्रचार सामग्री बनाई थी उसमें एक खालिस्तानी आतंकी का फोटो था जिसे भारत की आपत्ति के बाद हटा दिया गया था।

Posted By: Yogendra Sharma

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