जम्मू। कश्मीर में चिनाब नदी पर बन रहे रेल पुल का काम तेजी से जारी है। अब तक यह 60 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है और इंजीनियरिंग के इस नायाब नमूने को अगले साल तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही यह दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल बन जाएगा। विश्व के इस सबसे ऊंचे रेलवे पुल के निर्माण पर 1200 करोड़ की लागत आएगी। यह पुल पेरिस के एफिल टॉवर से भी 35 मीटर ऊंचा होगा। इसके बनने के बाद कश्मीर का देश के अन्य हिस्सों से रेल नेटवर्क बेहतर होगा। इसे रेलवे के इतिहास का सबसे कठिन पुल बताया जा रहा है और चिनाब नदी से इसकी ऊंचाई 359 मीटर है। इस ऊंचाई पर निर्माण आसान नहीं था लेकिन फिर भी यह काम हो रहा है।

कोंकण रेलवे कारपोरेशन लिमिटेड के महाप्रबंधक संजय गुप्ता ने बताया कि यह करीब 150 वर्ष पुराने भारतीय रेलवे द्वारा निर्मित सबसे कठिन पुल है। चिनाब दरिया से 359 मीटर की ऊंचाई तक पिलर बना पाना संभव नहीं था, इसलिए रेलवे ने लोहे की फाउंडेशन को तैयार किया है। इसके निर्माण पर 24 हजार टन इस्पात का इस्तेमाल किया जाएगा। प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि पुल का निर्माण कार्य शुरू करने से पहले 20 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़क और 400 मीटर की गुफा का निर्माण किया गया। चिनाब पुल में ऐसी तकनीक व उपकरण इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जो पूरे विश्व में अपनी तरह का प्रथम प्रयोग है। पहली बार इतने ऊंचे पुल के निर्माण में मेहराब तकनीक (लांचिग आर्क) को आधार बनाया गया है। पिछले साल ही इसका मजबूत मेहराब बनकर तैयार हुआ है। पुल का एक छोर रियासी के कौड़ी तो दूसरा सिरा बक्कल में है।

कटड़ा-बनिहाल सेक्शन किसी चुनौती से कम नहीं

कटड़ा से बनिहाल तक रेल सेक्शन 111 किमी लंबी है। जम्मू-ऊधमपुर और ऊधमपुर-कटड़ा सेक्शन भी अधिक चुनौतीपूर्ण कटड़ा-बनिहाल रेल सेक्शन है। इस क्षेत्र में होने वाले निर्माण कार्य के लिए 160 किलोमीटर का सड़क मार्ग बनाया गया है। यह सड़क दूरदराज के गांवों को मुख्यधारा से जोड़ते हुए बेहतर लिक उपलब्ध करवा रहा है। इस सेक्शन पर कार्य करने वाले इंजीनियरों को बेहद कठिन, दुर्गम क्षेत्र, तकनीकी समस्याओं और आतंकी गतिविधियों के कारण प्रतिकूल सुरक्षा व्यवस्था का भी सामना करना पड़ा है।

पांच सौ साल है पुल की उम्र

चिनाब दरिया पर बन रहे पुल का निर्माण कार्य वर्ष 2004 में शुरू हुआ था। अब कोंकण रेलवे ने अफकान कंपनी को इसका जिम्मा सौंप दिया है। निर्माण करने वाली कंपनी ने पुल की मजबूती को लेकर 120 साल की वारंटी दी है, जबकि उसका दावा है कि पुल 500 साल तक टिका रहेगा। पुल की चौड़ाई 13 मीटर है, जिसमें 150 मीटर ऊंचे 18 पिलर होंगे। पुल पर रेलगाड़ी और ढांचे से पुल की नींव और पिलर पर 10 एमएम वर्ग मीटर जगह में 120 टन वजन पड़ेगा। पुल की भार वहन करने की क्षमता 500 टन होगी। यह पुल 260 किलोमीटर प्रति घंटे की गति की हवाओं का वेग सहन कर सकेगा।

पुल की खासियत

-चिनाब से ऊंचाई : 359 मीटर

- निर्माण पर 24 हजार टन इस्पात का होगा इस्तेमाल

-1200 करोड़ हुई कुल लागत, पहले था 512 करोड़ का अनुमान

-500 साल तक मजबूती से टिका रहेगा पुल

-पुल की चौड़ाई 13 मीटर, 150 मीटर ऊंचे 18 पिलर होंगे

-पुल की भार वहन करने की क्षमता 500 टन होगी।

-260 किमी प्रति घंटे की गति की हवाओं का वेग सहन कर सकेगा

Posted By: Ajay Barve

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