Kawad Yatra 2020: सावन के महीने में निकलने वाली कावड़ यात्राओं पर फिलहाल कोरोना के चलते संकट छाया हुआ है। बाबाधाम देवघर (झारखंड) में श्रावणी मेले का आयोजन भी संकट में पड़ गया है। जानकारी के मुताबिक पिछले 200 साल से यहां श्रावणी मेले का आयोजन होता आया है और कांवड़िए भोला बाबा पर जलाभिषेक करते हैं। इस बार राज्य सरकार ने कांवड़ यात्रा निकालने की अनुमति देने से इंकार कर दिया है। सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण के कारण बनीं स्थिति को इसके लिए जिम्मेदार बताया है। सरकार ने कहा कि इससे कोरोना का संक्रमण फैलने का खतरा है। इधर हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखते हुए बिहार सरकार ने श्रावणी मेले के आयोजन को झारखंड सरकार का मामला बताया। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि कुछ शर्तों के कांवड़ यात्रा की अनुमति दी जा सकती है। बहरहाल हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में अदालत अब 3 जुलाई को फैसला सुनाएगी।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया कि फिलहाल राज्य में कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम हुई है। सावन में देवघर मंदिर खोले जाने और कांवड़ यात्रा शुरू करने पर लाखों की भीड़ जमा होगी। इससे कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है। सरकार ने राज्य में लॉकडाउन की अवधि 31 जुलाई तक बढ़ा दी है। इसके अलावा धार्मिक स्थल खोलने, मेले और सामाजिक आयोजन पर भी रोक जारी है। ऐसे में कांवड़ यात्रा की अनुमति नहीं दी सकती।

इधर याचिकाकर्ता सांसद निशिकांत दुबे की ओर से अधिवक्ता रवि प्रकाश मिश्रा व खुशबू कटारूका मोदी ने अदालत को बताया कि कोरोना काल में रेल व बस की सेवा बंद होने से श्रावणी मेले में ज्यादा भीड़ नहीं होगी। मंदिर में जाने से पहले लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग की जा सकती है और केंद्र सरकार के तमाम निर्देशों का पालन भी किया जा सकता है। उन्होंने ये भी बताया कि श्रावणी मेले का आयोजन आज तक रोका नहीं गया है। देश में इससे पहले भी प्लेग और कॉलरा जैसी महामारी हुई थी, लेकिन उस समय भी श्रावणी मेले का आयोजन रोका नहीं किया गया।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा सशर्त पुरी की रथयात्रा की अनुमति के आदेश का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी ही कुछ शर्तों के साथ श्रावणी मेले का भी आयोजन किया जा सकता है। बता दें कि सांसद निशिकांत दुबे ने कांवड़ यात्रा, वैद्यनाथ धाम व बासुकीनाथ मंदिर खोले जाने की मांग को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है।

Posted By: Rahul Vavikar

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