कृषि सुधार के लिए संसद से पारित नए कानूनों पर आंदोलनकारी किसानों के साथ शुक्रवार को सरकार पूर्व निर्धारित बैठक करेगी। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने गुरुवार को बताया कि बैठक होगी, जिसमें सकारात्मक नतीजे की पूरी उम्मीद है। तोमर ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि सरकार खुले मन से बैठक में शामिल होगी और किसानों की आशंकाओं को दूर करेगी। 11 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सुनवाई में कुछ अहम फैसले सुनाए थे। इसके तहत चार सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन कर दिया गया है, जो किसान संगठनों के साथ सरकार से भी बातचीत कर अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपेगी। इसके बाद नौवें दौर की बैठक को लेकर असमंजस बढ़ गया था। लेकिन स्थिति को स्पष्ट करते हुए तोमर ने कहा कि शुक्रवार को दोपहर 12 बजे बैठक होगी। आंदोलनकारी किसान संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति के सदस्यों पर आक्षेप लगाते हुए उसके समक्ष जाने से मना कर दिया है। किसान संगठनों का कहना है समिति में नामित सदस्यों का रुख तीनों नए कानूनों के पक्ष में है। इस बीच, कोर्ट द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति में नामित भारतीय किसान यूनियन (मान) के अध्यक्ष भूपिदर सिह मान ने समिति से अपना नाम वापस लेने का फैसला किया है।

शीर्ष अदालत ने मंगलवार को तीनों कृषि कानूनों के अमल पर रोक लगा दी। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के हजारों आंदोलनकारी किसानों ने दिल्ली की सीमा पर कई सप्ताह से डेरा डाल रखा है। वे कृषि सुधार के तीनों कानूनों को रद करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी की मांग पर अड़े हुए हैं। वे सरकार के किसी प्रस्ताव पर चर्चा करने तक को राजी नहीं हैं।

Posted By: Navodit Saktawat

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