प्रयागराज में कुंभ मेला शुरु हो गया है। मकर संक्रांति पर पवित्र स्नान के साथ आयोजन का शुभारंभ हो गया और श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कुंभ मेले की शुरुआत शाही स्नान से हुई और यहां कई साधु डुबकी लगाते हुए नजर आए। शाही स्नान कुंभ मेले का बहुत अहम हिस्सा है और इस दौरान एक खास समय पर पवित्र नदी के जल में डुबकी लगाई जाती है। अखाड़ों के शाही स्नान का क्रम शाम तक चलता रहा। अखाड़ों के लिए अलग-अलग समय स्नान के लिए निर्धारित किया गया था। हर अखाड़े के लिए करीब 40 मिनट का समय तय था। सब कुछ करीब-करीब निर्धारित समय के साथ ही चला।

हर तपस्वी की यही इच्छा होती है कि वो धर्म के सबसे बड़े मेले में संगम तट पर शाही स्नान का हिस्सा बनें।

सूर्य उत्तरायण होने पर त्रिवेणी तट पर साध्य, साधना और साधक का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रथम शाही स्नान पर अखाड़ों में अनुशासन, परंपरा व समर्पण नजर आया।

हर अखाड़े के संतों ने सर्वप्रथम अपने आराध्य को डुबकी लगवाई, उसके बाद अस्त्र-शस्त्र और फिर खुद स्नान किया।

महामंडलेश्वर, मण्डलेश्वर, श्रीमहंत, महंत शाही सवारी से संगम पहुंचे। बड़ी संख्या में नागा सन्त नाचते जयकारा लगाते संगम पहुंचे।

जूना अखाड़ा में शामिल किन्नर अखाड़ा ने सन्यासियों ने संगम पट पर शाही स्नान किया।

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