वर्ष 2021 के अंतिम सूर्य ग्रहण की छाया से भले ही उत्तरी गोलार्द्ध वंचित रहा हो, लेकिन सूर्य के बाहरी वातावरण (कोरोना) पर शोध कर रहे दुनियाभर के विज्ञानियों के लिए यह पल खास रहा। करीब 4ः08 घंटे के पूर्ण ग्रहण को अंटार्कटिका से देखा जा सका। अब अगला सूर्य ग्रहण अप्रैल में लगेगा। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के वरिष्ठ सौर विज्ञानी व पूर्व निदेशक डा. वहाबउद्दीन ने बताया कि शोध के लिहाज से पूर्ण सूर्य ग्रहण विज्ञानियों के लिए अहम माना जाता है। इस दौरान सूर्य के कोरोना को देखने का अवसर मिलता है, जिसका ताप सूर्य की सतह से कई गुना अधिक होता है। कोरोना ताप की यह गुत्थी हैरत में डालती है। इस बारे में शोध के लिए विज्ञानियों को पूर्ण सूर्य ग्रहण का बेसब्री से इंतजार रहता है। यही कारण है कि भारत के भी कई विज्ञानी अंटार्कटिका क्षेत्र में पहुंचे थे।

भारतीय समय के अनुसार, सुबह 10ः59 बजे सूर्य ग्रहण के प्रभाव में आना शुरू हुआ। 1.03 बजे सूर्य पूरी तरह ग्रहण की चपेट में रहा। शाम 3.07 बजे सूर्य ग्रहण की छाया से मुक्त हो गया। यह ग्रहण 4.08 घंटे का रहा, जिसे दक्षिणी अमेरिका, दक्षिणी अफ्रीका, अंटार्कटिका व आस्ट्रेलिया से देखा जा सका।

Posted By: Navodit Saktawat