Leap Year 2020 : आज का दिन कुछ खास है। आज 29 फरवरी है, जो कि 4 साल में एक बार आती है। यह लीप ईयर है और आज लीप ईयर डे है। ऐसे कई लोग हैं जो इस दिन जन्‍मे लेकिन देश में एक ऐसा भी शख्‍स है जो लीप ईयर डे के दिन पैदा हुआ तो घरवालों ने नाम ही लीप ईयर रख दिया। सुनने में यह बात अटपटी लगती है लेकिन सच है। इनका पूरा नाम लीप ईयर बोस है, जो हावड़ा में रहते हैं। यह नाम भी शौकिया नहीं है बल्कि पूरी तरह से आधिकारिक है। जन्‍म प्रमाण पत्र से लेकर आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड, पहचान पत्र, स्‍कूल के प्रमाण-पत्र आदि सरकारी दस्‍तावेजों में उनका यही नाम दर्ज है। है ना कमाल की बात। आइये आपको लीप ईयर बोस की अनोखी जिंदगी से रूबरू कराते हैं।

संस्‍कृत के शिक्षक हैं, नाम ही बन गया है पहचान

64 साल के लीप ईयर बोस पेशे से टीचर हैं। गत 22 साल से वे हावड़ा के सलकिया एंग्‍लो संस्‍कृत हाईस्‍कूल में बतौर संस्‍कृत टीचर सेवाएं दे रहे हैं। वे खुद भी इसी स्‍कूल से पढ़े हैं। 64 वर्षीय लीप ईयर बोस अपने इस अजीब नाम को लेकर पूरी तरह सहज हैं। आसपास के लोग उन्‍हें लीप ईयर दादा पुकारते हैं तो स्‍टूडेंट्स लीप ईयर सर।

ऐसे पड़ा यह अनोखा नाम

उनके इस नाम के पीछे भी रोचक कहानी है। यह नाम उनके अभिभावकों नहीं, बल्कि फैमिली डॉक्‍टर डॉ. विमलेंदु दे सरकार ने रखा। 29 फरवरी, 1956 को जब उनका जन्‍म हुआ तो विमलेंदु सरकार से ही कहा गया कि वे बच्‍चे का नाम रखें। चूंकि वह लीप ईयर डे था, सो डॉक्‍टर साहब ने तपाक से कह दिया कि यह लीप ईयर में जन्‍मा है तो इसका नाम भी लीप ईयर ही होना चाहिये। बातों-बातों में नामकरण भी हो गया और मां-बाप को कोई ऐतराज़ भी ना हुआ। वे राजी हो गए।

बचपन में दोस्‍त टोकते थे पर कभी ध्‍यान नहीं दिया

लीप ईयर बोस बताते हैं कि उनका जन्‍मदिन भले ही चार साल में एक बार आता है लेकिन उन्‍हें इसका मलाल नहीं है। हां, बचपन में जरूर दोस्‍त टोकते थे, कहते थे कि हर साल तुम्‍हारा जन्‍मदिन नहीं आता है, पर उन्‍होंने कभी इन बातों पर ध्‍यान नहीं दिया। उन्‍होंने भी 29 फरवरी को पूरी गंभीरता से अपना जन्‍मदिन स्‍वीकारा और अन्‍य किसी दिन जन्‍मदिन नहीं मनाया। चार साल में एक बार जन्‍मदिन की अवसर आता था पर कभी शोरगुल या धूमधाम से नहीं मनाया। आज भी बेहद सादे तरीके से अपना यह खास जन्‍मदिन मनाने की तैयारी जो चार साल में एक बार आता है। यह खास अवसर वे परिवार, करीबी दोस्‍तों व स्‍कूल के स्‍टाफ व स्‍टूडेंट्स के साथ मनाएंगे।

बदलने की नहीं सोच सकता, इसी नाम से प्‍यार है

लीप ईयर बोस को अपना यह अनूठा नाम इस कदर पसंद है कि इसे बदलने की कभी मन में इच्‍छा नहीं हुई। वे कहते हैं, यह नाम बड़ों ने दिया था। यह मेरे जन्‍म के मौके पर सोचा गया था इसलिए इसे कैसे बदला जा सकता है। मैं तो ऐसा सोच भी नहीं सकता। यही नाम मेरी पहचान है। सबसे अधिक आसानी है कि इस नाम से मेरे घर का पता किसी को भी बहुत जल्‍दी मिल जाता है। लीप ईयर बोस के परिवार में पत्‍नी व एक बेटा है। उन्‍हें भ्रमण का शौक है।

Posted By: Navodit Saktawat