Gyanvapi Case Hearing: वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद मामले में जिला अदालत में सोमवार को पहले दिन सुनवाई हुई। करीब 40 मिनट की सुनवाई में जज ने दोनों पक्षों को सुना और मंगलवार तक के लिए सुनवाई टाल दी। इससे पहले सोमवार को दोपहर 2 बजे से सुनवाई शुरू हुई। जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेस की अदालत में मां श्रृंगार गौरी की दैनिक पूजा-अर्चना की अनुमति और अन्य देवी-देवताओं के विग्रहों को संरक्षित करने को लेकर दोनों पक्षों में जिरह हुई। यह तय होना है कि मामला आगे सुनवाई योग्य है या नहीं। कुल मिलाकर 4 याचिकाएं हैं। जानिए पहले दिन की सुनवाई की बड़ी बातें

- सुनवाई से पहले कोर्टरूम खाली करवाया गया। यहां सिर्फ 23 लोगों को रहने की अनुमति मिली जो केस से जुड़े हैं। इनमें अधिकांश वकील हैं। इसी दौरान पूर्व कोर्ट कमिश्नर अजय मिश्रा को अदालत में जाने की अनुमति नहीं मिली। 23 लोगों की लिस्ट में उनका नाम नहीं था। अजय मिश्रा ने ही पहले दौर की वीडियो ग्राफी की थी। मुस्लिम पक्ष ने अजय मिश्रा के खिलाफ शिकायत की थी।

- इसके बाद जिरह शुरू हुई। जज ने कोर्ट कमिश्नर विशाल सिंह को बुलाया गया। विशाल सिंह ने ही वीडियोग्राफी की थी और निचली अदालत में पेश की थी। जिला जज सर्वे की कॉपी के अहम बिंदु भी पढ़े।

- सुनवाई के दौरान 1991 वर्शिप एक्ट का भी जिक्र हुआ। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि हिंदू पक्ष की सभी याचिकाएं खारिज कर दी जाना चाहिए, क्योंकि ये याचिकाएं 1991 वर्शिप एक्ट के खिलाफ हैं। हिंदू पक्ष की ओर से इस संबंध में वकील विष्णु जैन ने दलीलें पेश की।

- मंगलवार को जज यह तय करेंगे कि वे किस क्रम में याचिकाएं सुनी जाएं और सुनवाई की अगली तारीख क्या हो?

Gyanvapi Case Hearing: इन मुद्दों पर जिरह

- मंदिर पक्ष ने अदालत से तहखाने की दीवार और मलबा हटाकर वीडियोग्राफी कराने की मांग की है।

- शिवलिंग की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई की बाबत रिपोर्ट भी मंगाने की अपील की है।

- जिला शासकीय अधिवक्ता (सिविल) महेंद्र प्रसाद पांडेय ने वजूखाने की मछलियों की जीवनरक्षा के लिए उन्हें अन्यत्र स्थानांतरित करने का आग्रह किया है।

- सील किए गए क्षेत्र में चारों तरफ पाइप लाइन व नल लगे हैं। इसका उपयोग नमाजी वजू के लिए करते हैं। पाइपलाइन को भी सील क्षेत्र से हटाने की मांग की है। दोनों प्रार्थनापत्रों पर मस्जिद पक्ष ने आपत्ति दाखिल की है।

दीवार तोड़ी तो ध्वस्त हो सकती है मस्जिद

अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद के सचिव अब्दुल बातिन नोमानी की ओर से आपत्ति दाखिल की गई है कि जिस संरचना को वादी पक्ष शिवलिंग कहते हैं, उसे तय करने का अधिकार सिर्फ अदालत को है। तहखाने की जिस दीवार को हटाने की मांग की गई है, उसे तोड़ा गया तो पूरी मस्जिद ध्वस्त हो जाएगी।

Posted By: Arvind Dubey

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