कोलकाता। उत्‍तर और पश्चिमी भारत में घर वापसी अभियान चलाने के बाद हिंदू संगठनों ने पश्चिम बंगाल में इसके खिलाफ एक अलग ही अभियान चलाना शुरू कर दिया है। हिंदू-मुस्लिम दंपती पर दबाव बनाने के बदले संगठन के सदस्य ऐसे जोड़ों की मदद कर रहे हैं। मगर, शर्त यह है कि ऐसे मामलों में दुल्हन मुस्लिम महिला को शुद्धिकरण के जरिए हिंदू धर्म अपनाना होगा।

इंडियन एक्‍सप्रेस में छपी एक खबर के मुताबिक यह अभियान बंगाल के उन जिलों चलाया जा रहा है, जहां हाल के कुछ चुनावों में बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन किया है। इन जगहों पर विश्व हिंदू परिषद, हिंदू जागरण मंच, हिंदू सहमति संगठन, भारत सेवाश्रम संघ ने 'बहू लाओ, बेटी बचाओ' अभियान शुरू किया है। जिसे 'लव जिहाद' का जवाब बताया जा रहा है।

नए तरह का धर्मांतरण कार्यक्रम

उत्तर और पश्चिम भारत में 'घर वापसी' अभियान से विरोधियों के निशाने पर आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात का विश्वास दिलाया कि धर्म को लेकर लोगों की व्यक्तिगत आजादी है, जिसे कोई हानि नहीं पहुंचा सकता। हालांकि, इस बीच देश के पूर्वी हिस्से में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने एक नए धर्मांतरण कार्यक्रम की शुरुआत कर दी है।

हिंदू समूहों को श्रेय दिया

इस अभियान के तहत हिंदू महिला-मुस्लिम पुरुष दंपती का मन बदलने से ज्यादा हिंदू पुरुष और मुस्लिम महिला वाले दंपती को शरण, उनकी शादी की व्यवस्था जैसी सुविधा मुहैया कराई जा रही हैं। पिछले दो महीने के दौरान साउथ 24 परगना, नार्थ 24 परगना, मुर्शिदाबाद, हावड़ा और बीरभूम जैसे जिलों में चुनाव के दौरान बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन किया है। इन इलाकों में हाल में शादी करने वाले ऐसे कई दंपती मिल जाएंगे जो अपनी शादी का श्रेय हिंदू समूहों को देते हैं।

500 मुस्लिम, इसाई महिलाएं बनीं हिंदू

विश्व हिंदू परिषद के नेता बादल दास इस इलाके में संगठन के अभियान के प्रमुख हैं। कहा जा रहा है कि साल भर के भीतर 500 मुस्लिम व ईसाई महिलाएं शादी के बाद हिंदू बनी हैं। सभी महिलाओं को हिंदू का नाम दिया गया है। अपनी सुरक्षा के लिए उनके परिवारों को भाजपा से जुड़ने की सलाह दी गई है।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

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