Chandra Grahan 2020 : आज 10 जनवरी, शुक्रवार की रात को चंद्र ग्रहण है। इस खगोलीय घटना को देखने के लिए देश व दुनिया में कई लोग इंतज़ार में हैं। इसे भारत में भी देखा जा सकेगा। भारतीय समयानुसार ग्रहण रात 10 बजकर 37 मिनट पर शुरू होगा और देर रात 2 बजकर 42 मिनट पर पूरा होगा। इस दौरान 11 जनवरी लग चुकी होगी। अब जबकि इस खगोलीय घटना को लेकर सभी के मन में जिज्ञासा है, आइये हम आपको चंद्र ग्रहण से जुड़े कुछ ऐसे रोचक तथ्‍य बताते हैं, जिन्‍हें जानकर आपको हैरानी होगी।

1. पूर्णिमा की रात को ही होता है चंद्र ग्रहण

- चंद्र ग्रहण तभी होता है जब पूर्णिमा की रात हो लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि ग्रहण हर पूर्णिमा पर घटित होगा। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि चंद्रमा की कक्षा Moon's Orbit हमेशा पृथ्‍वी की कक्षा Earth's orbit के साथ एक लाइन में जुड़ी नहीं होती है। जब भी पूर्णिमा होती है और चांद पृथ्‍वी व सूर्य के बीच एक सीधी रेखा में आ जाता है, ग्रहण की घटना होती है।

2. तीन प्रकार के होते हैं चंद्र ग्रहण

- चंद्र ग्रहण भी तीन प्रकार के होते हैं। पूर्ण ग्रहण, आंशिक ग्रहण और खंडच्छायायुक्त ग्रहण। एक पूर्ण चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्‍वी की छाया पूरी तरह से चांद की सतह को ढंक देती है। आंशिक ग्रहण तक होता है जब पृथ्‍वी की छाया चांद की सतह के एक छोटे से भाग को ही ढांक पाती है। खग्रास ग्रहण तब होता है जब पृथ्‍वी की हल्‍की सी बाहरी छाया चांद को ढंकती है।

3. ग्रहण जैसी एक घटना लेकिन ग्रहण नहीं

- 'Syzygy' साइज़ी एक ऐसी घटना होती है जिसमें तीन आकाशीय पिंड एक सीधी रेखा में एक साथ होते हैं। ऐसी घटना होने का मतलब ग्रहण होना नहीं होता है। यानी जब भी तीन ग्रह एक रेखा में आएं तो इसका अर्थ यह नहीं है कि हमेशा ग्रहण घटित हो। इस अवस्‍था को साइज़ी syzygy कहा जाता है।

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4. चांद की सतह से देख सकते हैं ग्रहण

आप चांद की सतह से भी चंद्र ग्रहण देख सकते हैं। सुनने में अजीब लगता है लेकिन यह सच है। अगर चंद्र ग्रहण के दौरान आप चांद की सतह पर खड़े हों तो आप पाएंगे कि पृथ्‍वी का एक भाग अंधेरे में दिखाई दे रहा है। ऐसा इसलिए होगा क्‍योंकि पृथ्‍वी के पीछे सूर्य होता है।

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5. पृथ्‍वी के वातावरण से चांद का रंग होता है तय

- अक्‍सर आपने देखा होगा कि पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चांद गहरा सुर्ख लाल हो जाता है। ऐसा पृथ्‍वी के वातावरण में मौजूद धूल के कणों के चलते होता है। सूर्य की किरणें पृथ्‍वी के एटमॉसफियर और इसमें मौजूद पार्टिकल्‍स से होकर गुज़रती हैं और इसके रिफ्लेक्‍शन के चलते चांद का रंग बदल जाता है।

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6. ग्रहण की अवधि ऐसे होती है तय

- पृथ्‍वी की छाया से ग्रहण का समय तय होता है। क्‍या आपने कभी सोचा है कि चंद्र ग्रहण का समय अलग-अलग क्‍यों होता है। असल में, यह पृथ्‍वी की छाया पर निर्भर है जो चांद पर पड़ती है। यह इसलिए भी हो सकता है जब चांद पृथ्‍वी की छाया की रेंज में घूम रहा होता है। यदि हां, तो चंद्र ग्रहण कुछ और समय के लिए बढ़ जाएगा।

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7. 'Totality' ग्रहण की एक अवस्‍था

- क्‍या आपको पता है जब जब ग्रहण के दौरान चांद पूरी तरह से अंधेरे में डूब जाता है तो उसे क्‍या कहा जाता है। जब चांद पूरा अंधेरे में होता है तो इसे टोटेलिटी 'Totality' कहा जाता है। यह केवल तब होता है जब पूर्ण चंद्र ग्रहण होता है। एक 'Totality' सामान्‍य तौर पर 2 घंटे रहती है। हालांकि इसकी अवधि कम भी हो सकती है।

8. सूर्यग्रहण से ज्‍यादा होते हैं चंद्रग्रहण

- हो सकता है आपने इस बात पर गौर नहीं किया हो लेकिन चंद्र ग्रहण की घटनाएं सूर्य ग्रहण की तुलना में कहीं अधिक होती हैं। इसकी वजह यह है कि पृथ्‍वी की छाया चांद से बड़ी है, इसलिए इसके ढंके जाने के चांस ज्‍यादा होते हैं।

Posted By: Navodit Saktawat

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