नई दिल्ली। महाराष्ट्र में शनिवार का दिन राजनीतिक घटनाक्रम के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ है। यहां भाजपा ने सबसे बड़ा उलटफेर करते हुए एनसीपी नेता अजीत पवार के समर्थन से सूबे में सरकार बना ली है। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सुबह 8 बजे देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद और एनसीपी लीडर अजीत पवार को उप मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई है। इसके बाद से ही महाराष्ट्र की सियासत गरमा गई है। यह पहला मौका नहीं है जब किसी राज्य में ऐसा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। इसके पूर्व साल 1982 में हरियाणा में भी भाजपा-लोकदल गठबंधन पर कांग्रेस भारी पड़ी थी। भाजपा-लोकदल की सरकार बनाने की सारी कोशिशों को धता बताते हुए कांग्रेस ने राज्य में अपनी सरकार बना ली थी।

1982 में ऐसे चली गई थी सियासी चाल

हरियाणा में 21 मई से 23 मई 1982 के बीच महाराष्ट्र जैसा ही राजनीतिक घटनाक्रम घटा था। लोकदल नेता चौधरी देवीलाल और भाजपा नेता डॉ. मंगल सेन ने तत्कालीन हरियाणा के राज्यपाल जीडी तपासे से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया था। दोनों नेताओं ने 90 में से 46 विधायकों के हस्ताक्षर वाला समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंपा था। इसके बाद राज्यपाल ने तपासे ने विधायकों के हस्ताक्षर की सत्यता को जांचने के लिए दोनों नेताओं को 24 मई तक इंतजार करने का कहा था। इस बीच 23 मई को ही कांग्रेस नेता चौधरी भजन लाल ने 36 विधायकों वाली कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले ली थी। राज्यपाल ने चौधरी भजनलाल को बहुमत साबित करने 15 दिनों का वक्त भी दिया था।

चंडीगढ़ राजभवन में विरोध में विधायकों ने की थी परेड

राज्यपाल द्वारा कांग्रेस की सरकार बनाने की प्रक्रिया पूरी करने से नाराज लोकदल और भाजपा के विधायकों ने चंडीगढ़ राजभवन में परेड भी निकाली थी। इस दौरान देवीलाल और डॉ. मंगल सेन भी मौजूद थे, हालांकि उनकी इस कवायद के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो सकी थी। इसके बाद भाजपा के शीर्ष नेता रहे अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी ने इस संबंध में तत्कालीन राष्ट्रपति से विरोध भी जताया था। दोनों नेताओं ने यह पूरा घटनाक्रम तत्कालीन प्रधानमंत्री रहीं इंदिरा गांधी के इशारे पर होने की बात भी कही थी।

साल 1982 में हुए विधानसभा चुनाव में हरियाणा में लोकदल और भाजपा ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था। इसमें से 31 सीटें लोकदल और 6 सीटों पर भाजपा उम्मीदवार जीते थे। वहीं कांग्रेस के 36 और जगजीवन राम की पार्टी के 3 विधायकों ने जीत हासिल कर ली थी। इसके अलावा 16 निर्दलीय विधायकों ने भी जीत हासिल कर ली थी।

राज्यपाल के मुंह पर कार्यकर्ता ने पोती थी कालिख

हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बनाने में राज्यपाल द्वारा समर्थन करने का गुस्सा भी फूटा था। राज्यपाल से नाराज चौधरी देवीलाल के एक समर्थक जोगिंदर सिंह हुड्डा ने फरीदाबाद के वाईएमसीए ग्राउंड में राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में राज्यपाल जीडी तपासे के मुंह पर कालिख पोत दी थी। इसके बाद चौधरी देवीलाल ने खुद फरीदाबाद के पुलिस थाने पहुंचकर जोगिंदर का बचाव किया था।

Posted By: Neeraj Vyas

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