नई दिल्ली। देश में एक तरफ जहां अब भी CAA और NPR का विरोध हो रहा है वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि राज्य में CAA और NPR को लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की और इसके बाद राज्य में अपने सहयोगी दलों कांग्रेस-एनसीपी को तगड़ा झटका देते हुए दो टूक कहा है कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) से किसी को डरने की जरूरत नहीं है। उद्धव ने कहा क CAA पर मुसलमानों को डराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के हवाले से यह भी कहा कि राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) असम के अलावा पूरे देश में कहीं लागू नहीं होने जा रहा। लेकिन देश में लागू होने वाले NPR की प्रक्रिया को उनकी सरकार राज्य में भी आगे बढ़ाएगी।

उद्धव का उनका बयान इसलिए अहम है, क्योंकि प्रधानमंत्री से मिलने के बाद उन्होंने कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मुलाकात की। माना जा रहा है कि वहां भी कांग्रेस के रुख के उलट उन्होंने एनपीआर पर आगे बढ़ने की बात कही। मुख्यमंत्री बनने के बाद राजनीतिक संतुलन साधने के मकसद से पहली बार दिल्ली आए उद्धव ठाकरे का एक बड़े सियासी मुद्दे पर नजरिया शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस के गठबंधन में तनाव बढ़ा सकता है।

उद्धव के रुख के उलट एनसीपी-कांग्रेस सीएए-एनआरसी का विरोध करने के साथ एनपीआर में एनआरसी से जुड़े सवालों को शामिल किए जाने की आशंका पर भी सवाल उठा रहे हैं। मगर ठाकरे ने अपने सहयोगी दलों की इन चिंताओं से इतर सीएए का पूरा समर्थन किया है। मोदी से मुलाकात के बाद उद्धव ठाकरे ने पत्रकारों से कहा कि प्रधानमंत्री से सीएए-एनआरसी और एनपीआर को लेकर उनकी बातचीत हुई। इस बातचीत में बनी समझ के आधार पर उनका मानना है कि सीएए को लेकर किसी को डरने की आवश्यकता नहीं है। यह कानून किसी को देश से निकालने का कानून नहीं है और न ही किसी को निकाला जाएगा।

उद्धव ने कहा कि यह सही है कि पड़ोसी देशों में उत्पीड़न के शिकार जो नागरिक हैं वे हिंदू हैं और सीएए उन्हीं को नागरिकता देने का कानून है। मोदी सरकार सीएए लाए जाने की प्रासंगिकता को इसी आधार पर सही ठहरा रही है। उद्धव ने बताया कि पीएम ने कहा कि पूरे देश में एनआरसी नहीं होने जा रहा है। केवल असम में एनआरसी है और इसकी वजह सबको मालूम है। एनपीआर लागू करने पर कांग्रेस-एनसीपी के एतराज से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हर दस साल में जनगणना होती है और एनपीआर इसका हिस्सा है। एनपीआर किसी को घर से बाहर निकालने के लिए नहीं है।

हालांकि सहयोगी दलों की चिंता के मद्देनजर उद्धव ने यह जरूर कहा कि यदि एनपीआर में खतरनाक पहलू सामने आएंगे तो फिर विवाद हो सकता है और तब वे इसे देखेंगे।

Posted By: Ajay Barve