हिम्मत हो तो कुछ भी किया जा सकता है और वो भी केवल अपने लिए नहीं बल्कि दूसरों के लिए भी। ऐसा ही कुछ करके दिखाया है मानसी नाम की एक 19 साल की लड़की ने जिसने अपनी हिम्मत और समझदारी से अपने पिता ही नहीं बल्कि कर्ज में डूबे 6 हजार दूसरे प्रवासी मजदूरों को भी अत्याचार से मुक्ति दिलाई है। मानसी के इस कदम की हर तरफ सराहना हो रही है और उसकी कहानी राष्ट्रीय महिला आयोग ने शेयर की है।

यह है मामला

दरअसल, मानसी अपने पिता के साथ तमिलनाडु में रहती थी। उसके अलाव 355 और भी मजदूर जो की ओडिशा के थे वो तमिलनाडु के पढुकुप्पम में ईट भट्टों पर काम करते थे। यह तिरुवल्लूर जिले में स्थित है। यह मजदूर यहां ईट भट्टों के मालिकों से एडवांस पैसे लेकर काम करते थे। मार्च में जब कोरोना के कारण लॉकडाउन हुआ तो इन लोगों ने 6 महीने का काम कर दिया था। बाद में मालिक ने इन मजदूरों को एक हफ्ते में तय ईटों की संख्या पूरी करने पर आजाद करने की मंजूरी दी।

मजदूरों ने मेहनत कर ज्यादा वक्त देते हुए तय समय में टार्गेट पूरा कर दिया। इसके नतीजतन भट्टों के मालिक ने उन्हें आजाद करने की बजाय अत्याचार करना शुरू कर दिया और अपने गुंड्डों से पिटाई करवा दी। भट्टों के मालिक ने बेरहमी से मजदूरों की पिटवाया जिसकी वजह से कई गंभीर रूप से घायल हो गए।

मानसी ने यह सब चुपचाप कैमरों में रिकॉर्ड कर लिया और अपने संपर्कों को भेजती रही। जल्द ही यह सब सोशल मीडिया में वायरल हो गया और इसके बाद राज्य सरकार ने इसका संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की। इसके बाद राज्य सरकार ने 150 बसों की व्यवस्था करते हुए 6750 मजदूरों को उनके गांव भिजवाया।

Posted By: Ajay Kumar Barve

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