पटना। अपनों द्वारा लावार‍िस छोड़ दिए गए मरीजों के कल्‍याण की दिशा में काम कर रहे गुरमीत सिंह को लंदन में इस साल का वर्ल्‍ड सिख अवॉर्ड दिया जा रहा है। गुरमीत को लंदन की संस्‍था द सिख डायरेक्‍टरी की 'सेवा में सिख' श्रेणी में दुनियाभर से आई सौ प्रविष्ट‍ियों में से चुना गया।

20 साल से ज्‍यादा समय से गुरमीत पटना मेडि‍कल कॉलेज और हॉस्‍पिटल में छोड़े गए मरीजों और लावार‍ि‍सों

की सेवा कर रहे हैं। हर रात गुरमीत मरीजों से मिलने अस्‍पताल जानते हैं और गरीबों के लिए दवाएं और खाना भी ले जाते हैं। लावारिस गुरमीत को अपने रक्षक के रूप में देखते हैं।

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लंदन में यह समारोह 19 नवंबर को होने जा रहा है और गुरमीत को तारीख करीब आने पर‍ चिंता हो रही है। उनकी गैरमौजूदगी में मरीजों की देखभाल की चिंता तो उन्‍हें है ही, वे अपने भाषण को लेकर भी चिंत‍ित हैं। वे कहते हैं 'मैं अंग्रेजी नहीं जानता हूं।'

दो मौकों पर ऐसो भी हुआ जब अस्‍पताल के अधिकारियों ने गुरमीत के प्रवेश पर प्रत‍िबंध लगा दिया था। लेकिन दोनों समय जिला मजिस्‍ट्रेट ने हस्‍तक्षेप किया और सिंह को अपनी सेवा जारी रखने की अनु‍मति दी।

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जहां दुनिया उन्‍हें परोपकारी व्‍यक्ति के रूप में सम्‍मान देने वाली है, वहीं गुरमीत को तो केवल अपने उन दोस्‍तों की परवाह है जिनका पेट भरा हो, जो चैन की नींद सो पाएं।