नई दिल्ली। पिछले साल के मुकाबले इस बार भले ही मौसम विभाग ने औसत से कम बारिश का अनुमान जताया था लेकिन जब बादल बरसे तो रिकॉर्ड तोड़ हुई। कईं राज्यों में बाढ़ के हालात पैदा हो गए और औसत से कहीं ज्यादा बारिश हुई है।

जलाशय पूरे भर चुके हैं और अति बारिश से जनजीवन भी प्रभावित रहा। कई राज्‍यों में तो अभी भी बारिश हो रही है। मौसम के जानकारों का अनुमान है कि अभी मानसून अभी पूरी तरह से विदा नहीं हुआ है। आइये समझते हैं इसका सिस्‍टम।

फिलहाल पीछे हटने का संकेत नहीं

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के पीछे हटने का कोई संकेत नहीं है। आम तौर पर, मानसून सितंबर के पहले सप्ताह में वापसी शुरू कर देता है। इस साल इसमें दो सप्ताह से अधिक की देरी हुई है। पिछले एक दशक में कई वर्षों में मानसून की वापसी 20 सितंबर के बाद ही शुरू हुई है।

राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र प्रमुख के सती देवी का कहना है कि, “मानसून की वापसी तुरंत होने की उम्मीद नहीं है। बारिश का दौर जारी है। यह क्रम 1 सितंबर से शुरू होना था। अगले पांच दिनों के लिए के लिए हमारे पास कोई संकेत नहीं है।''

बंगाल की खाड़ी के सिस्‍टम का अहम रोल

आईएमडी पुणे के जलवायु परिवर्तन अनुसंधान प्रभाग के प्रमुख एके श्रीवास्तव का कहना है कि, “हम पिछले एक दशक में मानसून की देरी की प्रवृत्ति को देख रहे हैं। यह बंगाल की खाड़ी में विकसित होने वाले सिस्‍टम के कारण हो सकता है। सितंबर में मॉनसून के बाद के हिस्से में अब भी अच्छी बारिश होती है।" इस वर्ष, दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत में भी एक सप्ताह की देरी हुई थी। यह 1 जून की अपनी निर्धारित तिथि के बजाय 8 जून को केरल में पहुंच गया। इसके बाद जून में बारिश की अत्यधिक कमी थी, जो 33 प्रतिशत की कमी के साथ समाप्त हो गई।

एक हजार से अधिक भारी बारिश की घटनाएं दर्ज

आईएमडी ने मई में सामान्य मानसून की भविष्यवाणी की थी। इस साल, मानसून के महीनों के दौरान कम से कम 1,400 भारी और अति भारी बारिश की घटनाएं हुईं, जिनमें से अगस्त में 1,000 से अधिक दर्ज की गईं।

आईएमडी पुणे के अनुसार, पिछले चार वर्षों की तुलना में इस वर्ष अगस्त और जुलाई में भारी और बेहद भारी बारिश वाले दिनों की संख्या सबसे अधिक थी।

सती देवी ने कहा, “हमारे पूर्वानुमान में, हमने कहा था कि मानसून की दूसरी छमाही में वर्षा सामान्य या औसत से ऊपर होगी। सितंबर में सक्रिय बारिश और मध्य भारत में औसत से अधिक बारिश इस मानसून की कुछ अतिरिक्‍त ख़ासियतें हैं।"

जून और जुलाई की गर्मी से अगस्‍त और सितंबर में हुई झमाझम

तापमान रिकॉर्ड से यह भी पता चलता है कि जुलाई में तापमान भारत में सबसे अधिक था। जून में तापमान रिकॉर्ड पर चौथा उच्चतम था और यह अगस्त में रिकॉर्ड छठा उच्चतम था। यही वजह है कि बाढ़ और भारी बारिश के कारण देश भर में 264 मौतें हुईं।

मानसून के महीनों में - जून, जुलाई और अगस्त में आईएमडी के अनुसार खराब मौसम की घटनाओं के कारण 500 से अधिक मौतें हुईं। मानसून मॉडल के अनुमानों से पता चलता है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून, जिस पर कम से कम 700 मिलियन लोग आजीविका के लिए निर्भर हैं, आने वाले वर्षों में यह स्थिति और बढ़ने वाली है।

Posted By: Navodit Saktawat

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