मुंबई। इस बार भारत में मानसून लंबे समय तक टिकने वाला है। 15 सितंंबर के बाद भी अभी मानसून विदा होने के संकेत नहीं दे रहा है। मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अरब सागर में निम्न दबाव की प्रणाली के चलते पश्चिमी राज्यों जैसे महाराष्ट्र और गुजरात में और अधिक बरसात हो सकती है।

26 सितंबर और तीन अक्टूबर के हफ्तों में भारत में 20 प्रतिशत और 99 प्रतिशत तक औसत से अधिक बरसात हो सकती है। अक्टूबर के पहले हफ्ते में भी औसत से अधिक मानसूनी वर्षा की उम्मीद है। इसलिए वह मानसून जो जून से शुरू होकर सितंबर में खत्म हो जाता था इस बार पांचवें महीने यानी अक्टूबर तक खिंचेगा।

छह सालों में पहली बार इस साल औसत से अधिक बरसात

भारत में इस साल मानसून देर से जाएगा। मौसम विज्ञानियों को उम्मीद है कि इसके अक्टूबर के शुरुआती हफ्ते तक खिंचने के प्रबल आसार हैं। लिहाजा, देश में पिछले छह सालों में पहली बार इस साल औसत से अधिक बरसात होगी।

भारतीय मौसम विभाग के अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि देश में औसत से अधिक बरसात की पूरी संभावना है। अगले दो हफ्ते में देश के कुछ हिस्सों में जमकर बारिश होगी। इसके साथ ही इस मौसमी बरसात का आंकड़ा 104 प्रतिशत पार कर जाएगा।

मौसम विभाग का कहना है

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार औसत या सामान्य बरसात 96 फीसद से 104 फीसद के बीच रहती है। जून से शुरू होने वाले चार माह के मानसून में इस औसत का आधार पिछले 50 सालों के 89 सेंटीमीटर बारिश के औसत से निर्धारित होता है।

जलाशयों में 85 फीसद पानी

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस बार देश भर के जलाशय जलनिधि से लबालब होंगे। पिछले दस सालों से जलाशयों में मानसूनी बारिश से संचित जल का औसत 70 प्रतिशत ही रहता था। लेकिन पिछले जलाशयों में इसका औसत 74 फीसद था।

इस साल जमकर हुई बरसात का नतीजा है कि इस 19 सितंबर तक देश भर के जलाशय बरसाती पानी से 85 फीसद तक भर गए हैं। इससे भूमिगत जल की कमी भी नहीं रहेगी और सूखाग्रस्त रहने वाले इलाकों में भी पानी कम नहीं पड़ेगा।