नई दिल्ली। मौसम विभाग द्वारा दी गई 10 अक्टूबर की तारीख आ चुकी है और विभाग के कहे अनुसार आखिरकार मानसून ने विदाई लेना शुरू कर दिया है। देश को तरबतर कर कईं राज्यों को बाढ़ के पानी में डूबो देने के बाद एक महीने की देरी से मानसून अब लौट रहा है। वैसे तो हर साल मानसून के लौटेने की तारीख 1 सितंबर होती है लेकिन इस बार यह एक महीने से भी ज्यादा देरी के बाद जा रहा है। जैसे-जैसे इसकी विदाई हो रही है, सुबह की हवा में ठंडक घुलने लगी है और जल्द ही सर्द हवाएं आपके दरवाजे पर दस्तक देने लगेंगी।

मौसम विभाग के अनुसार, मानसून ने बुधवार को यह पंजाब, हरियाणा व उत्तरी राजस्थान से विदाई ले ली। उधर बदरीनाथ धाम की चोटियों और हेमकुंड में बर्फबारी शुरू हो गई है। मानसून लौटने का अंदाजा इस बात से भी लग रहा है कि गांवों और शहरों में सुबह कोहरे की चादर नजर आने लगी है।

पहाड़ों में बर्फबारी से बढ़ी ठंड

मानसून की विदाई से पहले पहाड़ों में हो रही बर्फबारी ने वहां ठंड बढ़ा दी है। बुधवार को चमोली में बदरीनाथ धाम की चोटियों एवं हेमकुंड साहिब में बर्फबारी हुई। इससे क्षेत्र में ठंड बढ़ गई है। जबकि निचले इलाकों में बारिश से तामपान में गिरावट दर्ज की गई है। उत्तराखंड से शुक्रवार को मानसून की विदाई हो जाएगी।

हिमाचल प्रदेश में भी पहाड़ों में बर्फ गिर रही है। राज्य में सोमवार से ही कांगड़ा, कुल्लू, मनाली जगहों पर बर्फ गिरने लगी है। बर्फबारी से बंद हुआ रोहतांग दर्रा वाहनों के लिए बुधवार को ही खोला जा सका।

इस तरह हो रही मानसून की विदाई

बारिश में आई कमी को लेकर मौसम विभाग ने एक बयान में कहा है कि उत्तर-पश्चिमी भारत में प्रतिचक्रवाती हवाएं चलने और वातावरण में धीरे-धीरे नमी कम होने से बारिश में कमी आई है। इसलिए मानसून की बिदाई शुरू हो गई है। अगले दो दिनों में यह उत्तर-पश्चिमी भारत के कुछ और हिस्सों से लौट जाएगा और उसके अगले 2-3 दिन में मध्य भारत से भी बिदा होगा। 1961 में एक अक्टूबर को लौटा थाइससे पहले मानसून सबसे लेट 1961 में लौटा था। उस साल यह 1 अक्टूबर को बिदा हुआ था, लेकिन इस साल तो इसने यह रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।