नई दिल्ली। एटीएम से सबसे ज्यादा फ्रॉड महाराष्ट्र में होते हैं, जबकि इसके बाद दिल्ली का नंबर है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, साल 2018-19 में महाराष्ट्र में एटीएम फ्रॉड के 233 मामले सामने आए थे। दूसरे नंबर पर रहे दिल्ली में इस तरह के 179 मामले सामने आए थे, जिसमें करीब एक लाख रुपए या इससे अधिक की राशि शामिल थी।

बैंकों ने यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक को दी थी। एक अच्छी बात यह भी है कि असम, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा तीन ऐसे राज्य थे, जहां से इस तरह का एक भी मामला सामने नहीं आया है। दिल्ली में इस तरह के फ्रॉड से लोगों को करीब 2.9 करोड़ रुपए का चूना लगा। वहीं, महाराष्ट्र में इस तरह के फ्रॉड से लोगों को 4.81 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ और तमिलनाडु में एटीएम फ्रॉड की वजह से 3.63 करोड़ रुपए का नुकसान लोगों को हुए। वहीं, अगर बात पूरे देश की करें, तो एटीएम फ्रॉड के मामले 911 से 980 तक पहुंचे हैं।

हालांकि, एटीएम फ्रॉड की घटनाओं में इजाफा जरूर हुआ है। मगर, इसमें होने वाले नुकसान की राशि साल 2017-18 में 65.3 करोड़ रुपए से घटकर 21.4 करोड़ रुपए पहुंच गई है। हालांकि, पुलिस और सिक्योरिटी एक्सपर्ट ने कहा कि यह तो हिमखंड का सिर्फ ऊपरी हिस्सा है। क्योंकि एक लाख रुपए से कम के फ्रॉड के मामले डाटा के लिए नहीं लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि धोखेबाज कई साधनों का प्रयोग करके लोगों के बैंक खाते खाली कर रहे हैं।

सबसे आम तकनीक है स्किमर डिवाइस का इस्तेमाल। इसे जालसाल एटीएम या प्वाइंट ऑफ सेल मशीन्स में लगा देते हैं, जो फर्जी तरीके से कार्ड से डेटा कॉपी कर लेता है। इसके बाद इस डेटा को ब्लैंक कार्ड में डालकर अवैध ट्रांजेक्शन किए जाते हैं। वहीं, दिल्ली पुलिस ने ऐसे कई गैंग्स को पकड़ा है, जो उन एटीएम को निशाना बनाते हैं, जहां सिक्योरिटी कम हो।