कन्नौज। आठ माह तक जिसको सीने से लगाए रखा, उस मासूम का गला मां ने ही घोंट दिया। गरीबी और लाचारी में घर के छिटपुट विवादों के बीच हुई इस घटना की हकीकत को ढाई साल की मासूम ने बयां की। सास की सूचना पर पहुंची पुलिस ने महिला को हिरासत में ले लिया है और कार्रवाई के लिए उसके पति के आने का इंतजार कर रही है।

उप्र के कन्नौज स्थित कोतवाली छिबरामऊ के मोहल्ला बिरतिया निवासी शाहिद उर्फ शालू की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। वह चार माह पहले मजदूरी करने के लिए मुंबई गया था। यहां बीपीएल कार्ड धारक उसकी मां महबूबन, पत्नी रुखसार, ढाई साल की बेटी अनम, डेढ़ वर्षीय बेटे अरमान और आठ माह के मासूम अहद के साथ रहती थी। शुक्रवार सुबह अहद के शरीर में हलचल न होते देख महबूबन ने रुखसार से पूछा तो उसने नींबू पानी पिलाने के बाद हालत बिगड़ने की बात कही।

कुछ और देर हरकत न होने पर सास ने पुलिस को फोन किया। प्रभारी निरीक्षक बलराम मिश्रा मौके पर पहुंचे। रुखसार ने उनसे भी नींबू-पानी पिलाने की बात दोहराई। पुलिस ने ढाई वर्षीय बेटी अनम से पूछा तो उसने मामले से पर्दा उठा दिया। कहा कि मां बहुत गुस्से में थी। अहद लगातार रो रहा था। मां ने उसका गला दबा दिया। इस पर पुलिस ने रुखसार को हिरासत में लेकर अहद का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। यहां डॉक्टर अमित वर्मा व मोहम्मद शरीफ के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। रिपोर्ट में गला दबाने से मौत होने की पुष्टि हुई। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि मां रुखसार हिरासत में है। शाहिद का इंतजार किया जा रहा है।

घटना के बाद बड़ी तेजी से चर्चा उठी कि तीन दिन से बच्चे को कुछ न खिला पाने और उसे रोता देखकर मां ने उसकी हत्या कर दी। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इन चर्चाओं पर विराम लगा दिया। अहद के पेट में दूध मिला है, जो सुबह ही पिलाया गया था। वहीं उसकी आंत भी ठीक मिली है। चिकित्सकों ने तीन दिन से भूखे होने की पुष्टि नहीं की।

घर में होता था विवाद, पुलिस से की थी शिकायत

पड़ोसियों के मुताबिक घर में अक्सर विवाद होता था। सास महबूबन का कहना है कि रुखसार अक्सर बच्चों को पीटती थी। गुरुवार को पुलिस से शिकायत भी की थी लेकिन महिला सिपाही ने नाम नोटकर लौटा दिया। शुक्रवार को घर में आटा भी बिखरा पड़ा था और चूल्हा भी नहीं जला था। वहीं रुखसार का कहना है कि उसने अपने बच्चे को नहीं मारा है। पति जुए और शराब में कमाई उड़ा देता है। कहो तो मारपीट करता है। गुरुवार को छह हजार रुपये भेजे लेकिन सास ने नहीं दिए। बेटे के दूध और आटे के लिए पड़ोस के डॉक्टर से सौ रुपये उधार लिए थे। वहीं महबूबन का कहना है कि बेटे ने 6000 रुपये भेजे हैं। 5500 रुपये का कर्जा चुकाने के लिए कहा था। बहू को 500 रुपये दिए तो लेने से इंकार कर दिया।

घर में दो राशन कार्ड

सब पर राशन मिला प्रशासन की जांच में घर में दो राशन कार्ड मिले। एक कार्ड महबूबन, शाहिद, रुखसार और बच्चों के नाम मिले। वहीं दूसरे कार्ड दूसरे बेटे की पत्नी के नाम है। दोनों कार्ड पर लगातार राशन जारी हुआ है।