आगरा। भारतीय नौसेना दिवस शुक्रवार को है। दुनिया में हिंदुस्तानी नौसेना ताकत के हिसाब से सातवें स्थान पर है। वैसे देश में मुगलों के वक्त से ही नौसेना मजबूत रही है। यह सैन्य अभियानों में तो भाग लेती ही थी, समुद्री डाकुओं से व्यापारियों की सुरक्षा को भी इसका इस्तेमाल किया जाता था। आगरा इसका प्रमुख केंद्र था। यहां से इलाहाबाद तक व्यापार जलमार्ग से होता था।

मुगल नौसैनिक बेड़े के बारे में "आईन-ए-अकबरी" में अबुल फजल लिखते हैं कि पानी के जहाजों का इस्तेमाल व्यापारियों के सामान व हाथियों को एक स्थान से दूसरे तक ले जाने के लिए किया जाता था। अकबर का नौसैनिक विभाग भी था, जिसका काम नदियों की निगरानी और ऐसे यात्रियों की यात्रा की व्यवस्था करना था, जो किराया चुकाने में असमर्थ होते थे। अकबर के समय में ढाका इसका प्रमुख केंद्र थे। उसकी नौसेना में 3000 जहाज थे, जिन पर उस समय 8.5 लाख रुपये का वार्षिक खर्च होता था। औरंगजेब के समय वर्ष 1660 में खर्चा बढ़कर 14 लाख रुपये वार्षिक हो गया।

नाव से नदी पार करने के लिए उस समय कर देना होता था। हाथी को नदी पार कराने के लिए आठ आने और 20 आदमियों को नदी पार कराने पर एक आना लिया जाता था। सुरक्षा की दृष्टि से रात में विशेष परिस्थितियों को छोड़कर नाव चलाने की अनुमति नहीं थी। मुगल नौसेना नदियों की निगहबानी करती थी।

मुगलों की नौसेना ने जीते थे कई युद्ध

मुगल नौसेना ने कई सैन्य अभियानों में भाग लिया था। जहांगीर के समय बंगाल के गवर्नर इस्लाम खां ने अराकान के राजा को हराया था। उसके पास 80 बोट थीं। शाहजहां के समय मुगल नौसेना ने कोच्चि के खिलाफ जंग लड़ी थी। औरंगजेब के समय में बंगाल के वायसराय मीर जुमला ने वर्ष 1662 में 323 नावों के साथ असम के खिलाफ हुए युद्ध में भाग लिया था। मुगल सेना ने शत्रु के 350 जहाजों (बड़ी नावों) पर कब्जा कर लिया था। मीर जुमला की मौत के बाद शाही नौसेना नष्ट हो गई थी।

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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