सोनभद्र। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में सहायक प्रोफेसर डा. फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर इन दिनों बवाल मचा हुआ है। जबकि इतिहास के आईने में अगर गौर करें तो ऐसे कई लोग हुए हैं, जिन्होंने देवभाषा कही जाने वाली संस्कृत से न सिर्फ मौहब्बत की बल्कि इसके जरिए रचनाएं-अनुवाद आदि उल्लेखनीय कार्य भी किए हैं। इसी कड़ी में शामिल हैं सोनांचल के स्व. मुनीर बख्श जिन्होंने स्वामी अड़गड़ानंद के सानिध्य में रहकर न सिर्फ संस्कृत की तालीम हासिल की बल्कि उनकी रचना यथार्थ गीता का हकीकी गीता नाम से उर्दू में अनुवाद भी किया। एक जुलाई, 1943 को शाहगंज थाना के बनौरा गांव में जन्मे आलम ने बनारस हिदू विश्वविद्यालय से संस्कृत में स्नातक की उपाधि ली थी। इसके बाद हिदी में परास्नातक और बीएड करने के बाद सीमेंट फैक्ट्री चुर्क स्थित इंटर कॉलेज में संस्कृत शिक्षक के रूप में उनकी नियुक्ति हुई।

मुनीर बख्श आलम के बड़े पुत्र खुर्शीद आलम बताते हैं कि पिताजी को संस्कृत भाषा से विशेष लगाव था और अपने ज्ञान कोअधिक मजबूत बनाने के लिए वह स्वामी अड़गड़ानंद के सानिध्य में भी रहे। वहां पर उन्होंने गीता का सारगर्भित अध्ययन किया। साथ ही स्वामी अड़गड़ानंद की रचना यथार्थ गीता का भी गहराई से ज्ञान लिया। जिसके बाद 2000 में उन्होंने यथार्थ गीता का उर्दू अनुवाद हकीकी गीता नाम से किया। खुर्शीद बताते हैं कि उनके परिवार में सभी संस्कृत भाषा को लेकर विशेष लगाव रखते हैं। खुद उन्होंने भी संस्कृत भाषा की पढ़ाई की है।

Posted By: Yogendra Sharma