नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू को झटका देते हुए कहा कि उन्हें 2009 के आम चुनाव में सरकारी कर्मचारी से मदद लेने के आरोप में मुकदमे का सामना करना पड़ेगा।

जस्टिस रंजन गोगोई और एएम सप्रे की पीठ ने हालांकि सिद्धू की अपील पर उनके खिलाफ लगे कदाचार और चुनाव खर्च को लेकर झूठी जानकारियां देने के आरोप खारिज कर दिए।

सिद्धू ने हाल में राज्यसभा की सदस्यता और भाजपा से इस्तीफा देने के बाद नया राजनीतिक मोर्चा "आवाज-ए-पंजाब" बनाया है। सिद्धू ने 2009 के लोकसभा चुनाव में अमृतसर सीट पर कांग्रेस प्रतिद्वंद्वी ओम प्रकाश सोनी को हराया था।

सोनी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर सिद्धू पर आरोप लगाया था कि चुनाव में मदद हासिल करने के लिए उन्होंने पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (पीएसईबी) में एडिशनल सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर जगजीत सिंह सच्चू का तबादला अमृतसर कराया था।

इस आरोप पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने भी उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट के इस फैसले को सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

सोनी ने इसके अलावा अपनी चुनावी याचिका में सिद्धू पर आरोप लगाया था कि रिटर्निंग अफसर को दी जानकारियों में सिद्धू ने अपनी चुनावी बैठकों के खर्चों को कम करके दिखाया है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उचित साक्ष्यों के अभाव का हवाला देते हुए इस आरोप को खारिज कर दिया।

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