नई दिल्ली। निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्याकांड के चार दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए औपचारिकताओं को 'बिजली की गति" से पूरा किए जाने के बावजूद कानूनी दांवपेच खत्म नहीं हो रहे हैं। दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) ने भी एक और प्रक्रिया पूरी करते हुए मामले में एक दोषी मुकेश सिंह की दया याचिका नामंजूर करने की सिफारिश केंद्रीय गृह मंत्रालय से कर दी है। अब गृह मंत्रालय को अपनी टिप्पणी के साथ उसे राष्ट्रपति को भेजना है, जो दया याचिका का अंतिम रूप से निपटारा करेंगे। लेकिन मुकेश के वकील ने दिल्ली की अदालत में एक अर्जी दायर कर दया याचिका के निपटारे तक फांसी पर अमल टालने की मांग की है। इस अर्जी पर कोर्ट ने तिहाड़ जेल के अधिकारियों से फांसी के संबंध में शुक्रवार तक स्थिति रिपोर्ट मांगी है। वहीं, फांसी में हो रही देरी पर भाजपा और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं।

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया है कि उपराज्यपाल की ओर से दया याचिका नामंजूर करने की सिफारिश मंत्रालय को मिल गई है। उसका परीक्षण किया जा रहा है और जल्द ही उचित फैसला लिया जाएगा। मालूम हो कि दिल्ली सरकार ने बुधवार को ही मुकेश की दया याचिका खारिज करने की सिफारिश करते हुए 'बिजली की गति" से उसे उपराज्यपाल को अग्रसारित कर दिया था। इसके साथ ही दिल्ली हाई कोर्ट को सूचित किया था कि दोषियों को 22 जनवरी को फांसी नहीं दी जा सकती है, क्योंकि मुकेश सिंह ने दया याचिका लगा रखी है। दिल्ली की निचली अदालत ने सात जनवरी को ही निर्भया कांड के चारों दोषियों- मुकेश सिंह (32), विनय शर्मा (26), अक्षय कुमार सिंह (31) तथा पवन गुप्ता को तिहाड़ जेल में 22 जनवरी को सुबह 7 बजे फांसी देने का 'डेथ वारंट" जारी किया था।

अब अतिरिक्त सत्र जज सतीश कुमार अरोड़ा ने गुरुवार को तिहाड़ जेल के अधिकारियों से फांसी के संबंध में शुक्रवार तक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। इसके पहले जेल धिकारियों ने कोर्ट को बताया कि दोषी की याचिका लंबित होने की वजह से 22 जनवरी को फांसी दिए जाने के मसले पर उसने दिल्ली सरकार को पत्र लिखा है। कोर्ट मुकेश की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें राष्ट्रपति के समक्ष लगाई गई दया याचिका का हवाला देते हुए फांसी की सजा पर अमल स्थगित किए जाने की मांग की गई है। मुकेश की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि कुछ घटनाक्रमों की वजह से डेथ वारंट को खारिज जाने की जरूरत है।

इसके पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने 22 जनवरी को फांसी दिए जाने का निचली अदालत द्वारा जारी डेथ वारंट खारिज करने से इनकार करते हुए निचली अदालत में जाने को कहा था। इसके तत्काल बाद मुकेश के वकील ने सत्र अदालत में अर्जी लगाई थी। मालूम हो कि फांसी टालने के लिए अन्य दोषियों के पास भी इसी प्रकार के विकल्प हैं, जिसमें वह बारी-बारी से उन विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

आप-भाजपा,आमने-सामने

निर्भया के दोषियों को फांसी दिए जाने में देरी के लिए आप सरकार की लापरवाही जिम्मेदार है, वरना फांसी बहुत पहले हो चुकी होती। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में ही दोषियों की अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद केजरीवाल सरकार को दोषियों को (दया याचिका के लिए) नोटिस देने में ढाई साल लग गए। -प्रकाश जावडेकर, भाजपा नेता व केंद्रीय मंत्री

प्रकाश जावडेकर जी ने बयान दिया कि निर्भया के दोषियों को फांसी दिए जाने में दिल्ली सरकार की वजह से देरी हो रही है। इससे बड़ा असंवेदशील और झूठा बयान हो नहीं सकता, क्योंकि कानून-व्यवस्था पूरी तरह से केंद्र के अधीन है। दोषियों की दया याचिका को खारिज करने पर हमने तुरंत फैसला लिया। भाजपा को अपने झूठ के लिए माफी मांगनी चाहिए। -संजय सिंह, आप नेता

Posted By: Yogendra Sharma

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