नई दिल्ली। मानसून के सामान्य से कम रहने पर भी भारत की रेटिंग पर कोई असर आने की आशंका नहीं है। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने स्पष्ट किया है कि अगर सरकार आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाती है और फैसले लेने की रफ्तार बनाए रखती है तो रेटिंग अपग्रेड भी हो सकती है।

हालांकि एजेंसी ने चेताया भी है कि अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने की स्थिति भारत समेत सभी एशियाई देशों को प्रभावित करेगी। अलबत्ता भारतीय अर्थव्यवस्था विदेशी झटकों को सहने में सक्षम है। मूडीज की तरफ से अभी भारत को सकारात्मक आउटलुक के साथ बीएए3 रेटिंग प्राप्त है।

बुधवार को ही मौसम विभाग ने लगातार दूसरे साल मानसून सामान्य से कम रहने के अनुमान का एलान किया था। विभाग का कहना है कि इस बार मानसून 93 फीसद पर ही सिमट सकता है। मूडीज के रेटिंग एनालिस्ट आतसी शेठ ने कहा है कि भारत की रेटिंग को लेकर फैसला मानसून जैसे किसी एक फैक्टर पर निर्भर नहीं करता।

अलबत्ता यह अल्पकालिक नजरिये से जोखिम जरूर पैदा करता है। शेठ ने टैक्स मुद्दों के समाधान पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि टैक्स संबंधी अनिश्चितता निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार करने में बाधक है।

महंगाई में वृद्धि से बढ़ेगा जोखिम

महंगाई की दर यदि बढ़ती है तो यह रेटिंग को लेकर जोखिम में इजाफा कर सकती है। मौजूदा परिदृश्य में भारत के लिए 7.5 फीसद की आर्थिक विकास दर पर टिके रहना भी संभव नहीं दिखता। इसके साथ ही देश को टैक्स से जुड़े मुद्दों को सुलझाना होगा ताकि भारत में निवेश के माहौल पर असर न हो।

मूडीज ने कहा है कि भारत समेत एशिया की सभी उभरती अर्थव्यवस्थाएं विदेशी झटके सहने में सक्षम हैं। हालांकि, अगर अमेरिका ब्याज दरों में वृद्धि करता है तो उसका असर इन सभी अर्थव्यवस्थाओं पर भी हो सकता है। मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इन देशों को इस चुनौती का एक समान रूप से सामना करना होगा।

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