नई दिल्ली। कोरोना के इलाज के नाम पर निजी अस्पताल मनमानी फीस वसूल रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर में बीते दिनों में कई बार यह मामला उठ चुका है। मगर, अभी तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहं हुई है। इस बीच नोएडा के एक निजी अस्पताल का मामला सामने आया है, जिसमें Covid-19 का इलाज करा रहे एक व्यक्ति के परिवार को 14 लाख रुपए का बिल थमा दिया है, जो 20 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहा। हालांकि, इतनी रकम खर्च होने के बाद भी मरीज को बचाया नहीं जा सका।

अब इस मामले के तूल पकड़ने के बाद गौतमबुद्धनगर जिला प्रशासन ने कहा है कि वह इस मामले को देखेगा। अस्पताल के अधिकारियों और पीड़ित के करीबी रिश्तेदारों के मुताबिक, नोएडा निवासी और यूनानी चिकित्सक की रविवार को मृत्यु हो गई थी। उन्हें 7 जून को फोर्टिस अस्पताल नोएडा में भर्ती कराया गया था और उन्हें 15 दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया था। रिश्तेदारों में से एक ने कहा कि सोमवार को परिवार से 10 रुपए के स्टांप पेपर पर कानूनी घोषणा करवाने के बाद शव को कब्जे में दिया गया कि मृतक के परिजन आपसी सहमति के बाद तय हुई राशि अस्पताल को चुका देंगे।

अस्पताल ने पीड़ित परिवार को 14 लाख रुपए से अधिक का बिल दिया था। हालांकि, बाद में मृतक के बीमा कवर की चार लाख रुपए की राशि और परिवार की तरफ से पहले जमा कराए गए 25 हजार रुपए के बाद अस्पताल ने बिल को घटाकर 10.2 लाख रुपए कर दिया। हालांकि, फोर्टिस अस्पताल ने एक बयान में कहा कि इलाज की फीस पारदर्शी, रियायती और "सरकार के साथ हुए एमओयू के अनुसार सीजीएचएस (केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना) टैरिफ" के आधार पर थी।

अस्पताल ने बयान में कहा- मरीज के परिवार को हर कदम पर उपचार के विवरण के बारे में बताया गया और रोगी की जीवनशैली के बारे में भी परामर्श दिया गया…। विवरण सीएमओ कार्यालय को भी प्रस्तुत किया गया है। हमारी पारदर्शी बिलिंग प्रक्रिया ने यह सुनिश्चित किया कि उपचार के दौरान होने वाले खर्चों के बारे में रोगी के परिवार को सूचित करते रहा जाए। इस मामले में बिलिंग प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं है।

इस बीच, जिला प्रशासन ने कहा कि निजी अस्पताल की फीस "स्व-विनियमन" पर आधारित है। हम मामले को देख रहे हैं, लेकिन मीडिया ने Covid-19 रोगी के निजी अस्पताल द्वारा लगाए गए चार्ज के बारे में असत्यापित रिपोर्ट दी है। गौतमबुद्ध नगर के जिला मजिस्ट्रेट सुहास एलवाई ने कहा कि स्वास्थ्य टीम को इस मामले को देखने के लिए कहा गया है। यह पूछे जाने पर कि क्या जिला प्रशासन ने Covid-19 रोगी के इलाज करने के लिए निजी अस्पतालों द्वारा लगाए गए चार्ज पर एक कैप लगाई है या खर्चे की ऊपरी सीमा लगाई गई है।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

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