नई दिल्ली। नोटबंदी के सत्रह दिन बीतने के बाद भी बैंकों में नकदी की स्थिति सामान्य होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। रिजर्व बैंक (आरबीआइ) की तरफ से नकदी का प्रवाह होने के बावजूद बैंकों की शाखाओं में नकदी की अभूतपूर्व कमी ने पूरी बैंकिंग व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

जिन बैंकों को नकदी का प्रवाह बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उन्हीं बैंकों ने सरकार की आंखों में धूल झोंक काले धन को सफेद करके आम जनता को नकदी की पहुंच से दूर कर दिया है। यही नहीं, बैंकों तक नकदी पहुंचाने के सिस्टम में भी अब झोल दिखनी लगी है। अधिकांश बैंकों की शाखाओं में अभी तक 500 के नए नोट या तो पहुंचे ही नहीं हैं या फिर उन्हें बेहद सीमित संख्या में मिल रहे हैं।

- नकदी का प्रवाह कम रहने में बैंक प्रबंधक ही संदेह के घेरे में

- बैंकों की शाखाओं में समय से पहले समाप्त हो रही है नकदी

- बैंकों में पिछले दरवाजे से काला धन सफेद किए जाने की आशंका

- रिजर्व बैंक की निगरानी के बावजूद नहीं बढ़ रहा नकदी का प्रवाह

- सीमित शाखाओं को ही मिल रहे हैं 500 रुपये के नए नोट

पिछले कुछ दिनों में जिस तरह से कई बैंकों के मैनेजर पुलिस या आयकर विभाग के घेरे में फंसे हैं, उससे स्पष्ट है कि आम लोगों के लिए हो रही नकदी की कमी में शाखाओं में पिछले दरवाजे से सफेद हो रहे काले धन का बड़ा हाथ है।

नोटबंदी की घोषणा के बाद के शुरुआती दिनों में ही बैंक प्रबंधकों ने चालू खाते का इस्तेमाल कर अरबों रुपये के काले धन को सफेद बना दिया। बैंकों ने न सिर्फ अरबों रुपये जमा किए, बल्कि उन्हें किसी दूसरे बैंक खाते में इलेक्ट्रॉनिक्स भुगतान के तहत हस्तांतरित भी किया।

इसके अलावा बैंक शाखाओं के स्टाफ ने काला धन सफेद करने में मदद करने के लिए जन धन खातों का भी खूब इस्तेमाल किया। नोटबंदी की घोषणा के बाद जन धन खातों में आई 21,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि इसका खुला प्रमाण है।

जानकार बताते हैं कि बिना बैंक अफसरों की मिलीभगत के ऐसा होना संभव ही नहीं है। बैंकिंग सूत्र बताते हैं कि नोटबंदी की घोषणा के चार दिन बाद ही जन धन खातों में भारी भरकम राशि जमा कराए जाने की सूचना मिल गई थी। इसके बावजूद बैंक प्रबंधकों की मिलीभगत के चलते इन खातों में काला धन जमा होना जारी रहा।

जन धन खातों के अलावा बैंक प्रबंधन इस काम के लिए उन अकाउंट का इस्तेमाल भी कर रहे हैं, जिनमें आमतौर पर लेनदेन बहुत कम होते हैं। चूंकि सभी खातों की पूरी जानकारी जिनमें आधार नंबर से लेकर पहचान पत्र तक सब कुछ बैंककर्मियों को उपलब्ध होता है, इसलिए वे इन खातों के आधार पर भी पुरानी नोटों को नई करेंसी में बदलने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।

देश में नकदी की कमी की एक बड़ी वजह यही है कि बैंक प्रबंधन पिछले दरवाजे से काला धन सफेद करने में मददगार साबित हो रहा है। इसके चलते ही आम जनता के लिए बैंक शाखाओं में पर्याप्त नकदी की कमी होती जा रही है।

नकदी की कमी की दूसरी वजह 500 रुपये के नोट की पर्याप्त मात्रा में शाखाओं को आपूर्ति न होना है। बताया जा रहा है कि नई करेंसी में निजी बैंकों को वरीयता मिल रही है। इसलिए सरकारी बैंकों की शाखाओं में नकदी की कमी बनी हुई है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली में सरकारी बैंकों की कई शाखाओं में अब तक 500 रुपये के नोट नहीं पहुंचे हैं। 500 रुपये के नए नोट केवल उन्हीं शाखाओं को उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिनके अधिकार क्षेत्र में एटीएम प्रबंधन है।

एटीएम भी वही जिनमें नई करेंसी के लिहाज से बदलाव हो चुका हो। इतना ही नहीं, भारतीय स्टेट बैंक की कुछ शाखाओं को तो अपने नेटवर्क से नकदी भी नहीं मिल रही है। उनसे आइसीआइसीआइ बैंक की चेस्ट से नकदी लेने को कहा जा रहा है।

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