अहमदाबाद। गुजरात की जीवनदायनी नर्मदा नहर कच्छ के रण तक पहुंच गई है। बुधवार को नर्मदा का नीर नर्मदा नहर के जरिए मांडवी के रायण गांव की मोडकूबा नहर में बहा तो ग्रामीणों ने उत्साह के साथ उसका स्वागत किया।नर्मदा नीर के स्वागत के लिए सैकड़ों लोग मोडकूबा नहर के पास खड़े हुए तथा नर्मदा नहर के जल का आचमन कर उसका स्वागत किया।

गुजरात में बने सरदार सरोवर नर्मदा बांध से नर्मदा मुख्य नहर राजस्थान के पाली –सिरोही जिले तक बनी है जिसकी लंबाई करीब 532 किलोमीटर है। उपनहर व शाखा नहरों की लंबाई हजारों किलोमीटर है। कच्छ के मांडवी में बुधवार को पहली बार नर्मदा का पानी नहर के जरिए पहुंचा। इस दौरान लोगों ने उत्साहपूर्वक उसका स्वागत किया।

बुधवार को कच्छ जिले के मांडवी तालुका में केबीसी के टेल-एंड को चिह्नित करने वाले गांव मोद कुबा में नर्मदा का पानी पहुंचते ही कच्छ शाखा नहर (केबीसी) के किनारे सैकड़ों लोगों ने लाइन में लगना और खुशी मनाना शुरू कर दिया। सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड (एसएसएनएनएल) के अधिकारियों ने कहा कि विकास ने केबीसी के पूरा होने को चिह्नित किया, जो एकमात्र शाखा नहर थी।

और नर्मदा बांध से नर्मदा का पानी 750 किलोमीटर तक पहुंच गया। 350 किलोमीटर केबीसी के सभी सिविल कार्य और इंजीनियरिंग कार्य पूरे हो चुके हैं और अब पिछले सप्ताह से नहर में पानी छोड़ कर नहर का परीक्षण किया जा रहा है। इस पानी के गुरुवार की तड़के केबीसी के टेल एंड मोड कुबा तक पहुंचने की उम्मीद है। सौराष्ट्र और उत्तरी गुजरात क्षेत्र पहले से ही सौराष्ट्र शाखा नहर और इसकी छह उप-शाखा नहरों के साथ-साथ उत्तरी गुजरात में नहर नेटवर्क के माध्यम से नर्मदा का पानी प्राप्त कर रहे हैं।

केबीसी राधनपुर के पास नर्मदा मुख्य नहर (एनएमसी) से निकलती है और रापर के पास कच्छ में प्रवेश करने से पहले कच्छ के छोटे रण को पार करती है। इस नहर को पूरा करने में कई चुनौतियाँ थीं। नहर के उतरते ही कच्छ के रण में गिर जाता है। इसे आगे बढ़ाने के लिए फिर से पानी उठाना होगा। दरअसल केबीसी का एक वर्ग जमीनी स्तर से 16 मीटर ऊपर है, जो छह मंजिला इमारत जितना ऊंचा है।

Posted By: Navodit Saktawat

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