Omicron third wave: भारत में ओमिक्रोन के मरीजों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। बेगलुरू (कर्नाटक) के बाद गुजरात और महाराष्ट्र के एक-एक मरीज में कोरोना के इस वैरिएंट की पुष्टि हो गई है। इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकारें अलर्ट पर हैं। संदिग्ध मरीजों पर लगातार नजर रखी जा रही है। एयरपोर्ट्स पर अलर्ट हैं। इस बीच, आशंका जताई जा रही है कि क्या Omicron के रूप में देश में कोरोना की तीसरी लहर आने वाली है या आ चुका है? कोविड टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. शशांक जोशी के मुताबिक, Omicron वैरिएंट लहर का रूप धारण करेगा या नहीं, इसके लिए छह से आठ हफ्ते तक इंतजार करना होगा। कुल मिलाकर यदि लोगों ने कोरोना नियमों का पालन नहीं किया, तो Omicron को कोरोना की तीसरी लहर बनने में वक्त नहीं लगेगा।

महाराष्ट्र में Omicron का पहला केस सामने आने के बाद प्रदेश के अतिरिक्त स्वास्थ्य सचिव डॉ. प्रदीप व्यास ने कहा है कि नागरिकों से कोरोना नियमों जैसे- मास्क लगाना, भीड़ में जाने से बचना, समय-समय पर हाथ धोना, इम्युनिटी बढ़ाने पर ध्यान देना, अनावश्यक यात्रा को टालना, पर ध्यान दिया जाएगा। साथ ही जिन लोगों ने कोरोना की दोनों वैक्सीन नहीं ली है, उन्हें दूसरे वैक्सीन लगवाई जाएगी।

जानिए भारत में कोरोना संक्रमण की ताजा स्थिति

भारत में कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या एक वर्ष से अधिक समय के बाद 1 लाख से नीचे है। वहीं केंद्र और राज्यों, दोनों ने एहतियाती उपाय शुरू कर दिए हैं ताकि ओमिक्रोन का प्रकोप दूसरी लहर की तरह न हो। देश ने वाणिज्यिक अंतरराष्ट्रीय यात्री उड़ानों की निर्धारित बहाली पर विराम लगा दिया है, और 'जोखिम वाले' देशों से आने वालों के लिए नए दिशानिर्देशों की भी घोषणा की है।

भारत को तीसरी लहर के लिए तैयार रहना चाहिए: विशेषज्ञ

इस बीच, देश के एक शीर्ष स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने कहा है कि भारत को ओमिक्रोन के कारण संभावित तीसरी लहर के लिए तैयार रहना चाहिए। एम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. विकास भाटिया ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, यह भविष्यवाणी करना बहुत मुश्किल है और इस समय भी जब 30 से अधिक देशों ने एक या अधिक केस की पुष्टि हो चुकी है, हम अभी भी कुछ और जानकारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस चरण में हमें खुद को तैयार करना चाहिए कि एक तीसरी लहर आ सकती है, लेकिन साथ ही, यह अच्छी खबर हो सकती है यदि हम पाते हैं कि ओमिक्रोन बहुत घातक नहीं है। अभी तक दुनिया के किसी भी हिस्से से किसी की मौत की खबर नहीं आई है। यह हल्का रोग हो सकता है। दक्षिण अफ्रीका जैसे कुछ देशों में संभवत यह देखा जा रहा है कि संक्रमण और रोग के प्रकट होने के बीच का अंतर थोड़ा लंबा है। जब यह डेल्टा वायरस से अधिक लंबा होता है, तो यह अधिक से अधिक लोगों को संचारित और संक्रमित करने की आशंका रखता है।

Posted By: Arvind Dubey