Surya Grahan के दौरान पिछले साल तीन बच्‍चों को पूरे ग्रहण काल के दौरान जमीन में गले तक गाड़कर रखा गया। ये बच्‍चे दिव्‍यांग हैं और इनके घरवालों ने किसी एक विशेष मान्‍यता के चलते यह किया। उनका विश्‍वास है कि ऐसा करने से इन बच्‍चों की विकृति दूर हो जाएगी और सारे कष्‍टों का निवारण हो जाएगा। अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने इस प्रथा के संबंध में राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग ने इस प्रथा को अमानवीय करार देते हुए राज्य सरकार को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

एनएचआरसी ने एक बयान में कहा, "आयोग ने कर्नाटक के कलबुर्गी जिले में दिव्यांग बच्चों को गले तक खाद के गड्ढे में दबाए जाने संबंधी मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया है। मान्यता है कि सूर्यग्रहण के दौरान तीखी किरणें बच्चों की विकृतियों को दूर कर देंगी।" बयान में कहा गया है कि ऐसे मामले जिले के ताज-सुल्तानपुर समेत तीन गांवों में सामने आए थे। सूचना मिलने पर जिला बाल संरक्षण कार्य बल ने बच्चों को मुक्त कराकर उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराया था और इसके बाद उन्हें उनके परिजनों को सौंप दिया था।

आयोग ने कहा कि यह बच्चों के मानवाधिकार के उल्लंघन के समान है। प्राधिकारियों के साथ-साथ बच्चों के परिजनों को भी जागरूक करने की जरूरत है कि अंधविश्वास के नाम पर बच्चों के साथ क्रूरता नहीं करनी चाहिए। एनएचआरसी ने कहा कि उसने इस मामले में मुख्य सचिव के माध्यम से कर्नाटक सरकार को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है। बयान के अनुसार, "आयोग ने यह जानना चाहा है कि क्या कलबुर्गी के अलावा राज्य के दूसरे जिलों में भी यह अमानवीय प्रथा जारी है? अगर ऐसा है तो प्राधिकारियों ने अबतक क्या कार्रवाई की है।"

यह था पूरा मामला

घटना कर्नाटक के कलबुर्गी के ताज सुल्‍तानपुर गांव की थी। इस सुदूर अंचल में सूर्य ग्रहण का इंतजार किया जा रहा था क्‍योंकि एक विशेष अनुष्‍ठान को पूरा किया जाना था। तीन बच्‍चों को परिजनों ने जमीन में गहरा गड़्ढा खोदकर उन्‍हें गले तक गाड़ दिया। जब तक ग्रहण लगा रहा, ये बच्‍चे इसी अवस्‍था में जमीन में दबे रहे। ग्रहण की अवधि समाप्‍त होने के बाद बच्‍चों को बाहर निकाल लिया गया। बच्चों को पास के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अधिकारियों के मुताबिक माता-पिता के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। कुछ अन्‍य गांवों में भी इसी तरह की घटना सामने आई है। प्रशासन मामले को लेकर हरकत में आ गया है।

बच्‍चों की उम्र 3, 8 और 11 साल

यह घटना सुबह 8 से 11 के बीच की है। जिन बच्‍चों को जमीन में गाड़ा गया, उनकी उम्र 3 साल, 8 साल और 11 साल बताई गई है। कालाबुर्गी तहसीलदार मल्‍लेशा को किसी ने फोन पर इसकी सूचना दी थी। जैसे ही घटनास्‍थल पर पहुंचे वहां हमने बच्‍चों को गहरे कीचड़ में दबा पाया। उन्‍हें बाहर निकाला और सीधे अस्‍पताल ले गए। कालाबुरागी जिले के अफजलपुर तालुक के अर्जुनगी गांव में भी ऐसी ही घटनाएं सामने आईं। एक अन्य घटना में विजयापुर में एक परिवार ने अपने 24 वर्षीय बेटे को दफन कर दिया जो शारीरिक विकृति से पीड़ित था।

Posted By: Navodit Saktawat

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