नई दिल्ली। आईएस के खिलाफ बने अंतरराष्ट्रीय माहौल और एकजुटता के बीच एमआईएम अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी के सुर बदल गए हैं।

उन्होंने आतंकी संगठन आईएस की तुलना "जहन्नुम के कुत्तों" से करते हुए मुस्लिम बिरादरी को उनसे दूर रहने की सलाह दी है और हथियार उठाने की बजाय शिक्षा का जिहाद शुरू करने की अपील की है।

ध्यान रहे कि कुछ दिन पहले ही ओवैसी ने आईएस समर्थक होने के संदिग्ध लोगों को कानूनी सहायता मुहैया कराने की बात की थी।

अपने संसदीय क्षेत्र हैदराबाद में जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने आईएस और इसके प्रमुख अबु बकर अल बगदादी को गैरइस्लामी और अपराधियों का गिरोह करार दिया। उन्होंने यहां तक चेतावनी दी कि अगर बगदादी सच्चे मुसलमानों की पकड़ में आया तो उसके सौ टुकड़े कर दिए जाएंगे और उसकी हड्डी भी नहीं मिलेगी।

मदीना में पैगंबर मुहम्मद साहब की मस्जिद के पास हमला कर इनलोगों ने अपना अंत निश्चित कर लिया है। उन्होंने मुसलमानों से इकट्ठा होकर ऐसे लोगों के प्रभाव को रोकने की अपील की जिनसे विद्वेष, घृणा और हिंसा फैलती है। उन्होंने कहा कि "इस्लाम के लिए जीना सीखें, मरना नहीं। और जिहाद करना है तो मुस्लिम बच्चों को शिक्षा दें, हथियार नहीं।"

ओवैसी के इस तरह के बयान को लेकर भाजपा ने सधे शब्दों में प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने कहा कि "अच्छी बात है कि उन्हें सदबुद्धि आई है, लेकिन हम इंतजार करेंगे। हम देखना चाहेंगे कि ओवैसी अपने भाई को कितनी ईमानदारी से सीख देते हैं।

वैसे, ओवैसी ने आईएस संदिग्धों के साथ हमदर्दी के बारे में अभी कुछ नहीं कहा है।" इसी बहाने श्रीकांत ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष उमर अब्दुला पर भी निशाना साधा और कहा कि आतंकवाद के मामले में कोई भी राजनीति नहीं होनी चाहिए। उमर को ऐसे मामलों में बयानों से बचना चाहिए।

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