नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि कश्मीर में बंद राजनीतिक नेताओं को रिहा करने का फैसला जम्मू-कश्मीर प्रशासन लेगा और केंद्र इसमें कोई दखल नहीं देगा। शाह ने कहा कि किसी भी नेता को एक दिन के लिए भी हिरासत में रखने का सरकार का कोई इरादा नहीं है। शाह सदन में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी द्वारा जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक नेताओं को हिरासत में रखे जाने और वहां के हालात पर किए गए पूरक प्रशन का जवाब दे रहे थे। शाह ने कहा कि स्थानीय प्रशासन को जब भी उचित समय लगेगा, हिरासत में रखे नेताओं को रिहा कर देगा। शाह ने कहा कि जिन राजनीतिक नेताओं को प्रतिबंधित आदेश के तहत जेल में रखा गया है, सरकार उनमें से किसी को भी एक दिन के लिए भी जेल में नहीं रखना चाहती है। कांग्रेस पर वार करते हुए शाह ने आरोप लगाया कि फारूक अब्दुल्ला छह माह से नजरबंद हैं जबकि कांग्रेस ने उनके पिता को 11 साल तक हिरासत में रखा था। उन्होंने कहा कि हमारा कांग्रेस के नक्शेकदम पर चलने का कोई इरादा नहीं है।

शाह ने कहा कि हम फोन पर प्रशासन को निर्देश नहीं देते हैं। यह आप (विपक्ष की पूर्व सरकार) कर सकते हैं, हम नहीं। उन्होंने कहा कि सभी नेताओं को घाटी में राजनीतिक नेताओं के बारे में चिंतित होना चाहिए, वह भी चिंतित हैं लेकिन यदि नेता कश्मीर के लोगों के बारे में अधिक चिंता करेंगे तो इससे बेहतर संदेश जाएगा।

सभी थाना क्षेत्रों से कर्फ्यू हटाया

कश्मीर घाटी में सामान्य स्थिति को लेकर विपक्ष के सवालों पर उन्होंने कहा कि सभी थाना क्षेत्र से कर्फ्यू हटाया लिया गया है। धारा 144 हटा ली गई लेकिन यह विपक्ष को यह सामान्य स्थिति नहीं लगती है। कक्षा 11वीं के 99.5 प्रतिशत विद्यार्थी परीक्षा में बैठे। श्रीनगर में सात लाख लोगों को ओपीडी सेवाएं दी गईं। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के बाद पुलिस गोलीबारी में एक भी व्यक्ति की मृत्यु नहीं हुई। यातायात व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है लेकिन यह उन्हें (कांग्रेस को) सामान्य नहीं लगता है।

कांग्रेस की यह है चिंता

कांग्रेस पर प्रहार करते हुए शाह ने कहा कि इनकी चिंता यह है कि राजनीतिक गतिविधि कब शुरू होगी। इनके लिए सामान्य स्थिति यही है। इनको राजनीतिक गतिविधि शुरू होने की चिंता है। गृह मंत्री ने कहा कि जम्मू कश्मीर में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने राजनीतिक गतिविधि की भी चिंता की है। वहां 40 हजार पंच सरपंचों के चुनाव हुए जो वर्षों से नहीं हुए थे। इसके अलावा तालुका और ब्लॉक स्तर के चुनाव भी हुए। इसमें लोगों ने बड़े पैमाने पर मतदान भी किया। शाह ने कहा कि स्थिति पूरी तरह सामान्य है।

चौधरी ने यह उठाया था सवाल

चौधरी ने सवाल किया था कि जम्मू-कश्मीर में फारूक अब्दुल्ला और दूसरे नेताओं को कब रिहा किया जाएगा तथा क्या वहां राजनीति गतिविधि बहाल है? इससे पहले गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि पड़ोसी देश पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर को लेकर गलत प्रचार कर रहा है, लेकिन सरकार वहां स्थिति सामान्य बनाए रखने को प्रतिबद्ध है।

Posted By: Navodit Saktawat

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