नई दिल्ली। संसद के शीत सत्र के पहले ही दिन सोमवार को विपक्ष ने विभिन्न् मुद्दों पर सरकार को घेरा। इसी क्रम में नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला को हिरासत में रखे जाने का मुद्दा लोकसभा में उठाया। उनकी हिरासत को अवैध बताते हुए उन्हें सदन में आने की अनुमति देने की मांग की। फारूक श्रीनगर से सांसद हैं।

विपक्षी सदस्यों ने अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद सांसदों को जम्मू-कश्मीर का दौरा करने से रोके जाने का भी मुद्दा उठाया। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने योरपीय यूनियन के सांसदों के कश्मीर दौरे पर सवाल उठाए।

क्या यह सांसदों का अपमान नहीं : चौधरी

चौधरी ने कहा- 'हमारे नेता राहुल गांधी को (जम्मू-कश्मीर) दौरे की अनुमति नहीं दी गई। कई सांसदों को वापस भेज दिया गया... जबकि योरप से आए संसदीय प्रतिनिधिमंडल को वहां ले जाया गया। क्या यह सभी सांसदों का अपमान नहीं है? मैं सत्ता पक्ष के भी सदस्यों से पूछना चाहता हूं कि क्या वे नहीं सोचते कि यह उनका अपमान है?"

नेशनल कांफ्रेंस सुप्रीमो की हिरासत का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि फारूक अब्दुल्ला 106 दिनों से हिरासत में हैं और सदन के सत्र में भाग लेना उनका संवैधानिक अधिकार है। चौधरी ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री को लोकसभा की कार्यवाही में भाग नहीं लेने देना 'क्रूरता" है।

वहीं कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तथा गांधी परिवार के सदस्यों की एसपीजी सुरक्षा हटाए जाने का भी मुद्दा सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि दिवंगत पूर्व पीएम अटल बिहारी भी एसपीजी की सुरक्षा में रहे थे। इसके पहले प्रश्नकाल शुरू होने के साथ ही कांग्रेस के करीब 30 सदस्य वेल में आकर नारेबाजी करते हुए मांग करने लगे कि सरकार विपक्षी नेताओं पर हमले और फर्जी मुकदमा करना बंद करे। इस मौके पर नेकां सदस्यों ने भी अपने नेता फारूक अब्दुल्ला की हिरासत का मुद्दा उठाया। फारूक की हिरासत का मुद्दा आरएसपी नेता एनके प्रेमचंद्रन ने भी उठाया। उन्हें वित्त मंत्रालय से संबंधित पूरक प्रश्न पूछने का मौका मिला था। उन्होंने कहा- 'फारूक अब्दुल्ला सदन में नहीं हैं। सदन में व्यवस्था नहीं है। मैं कोई सवाल पूछने की स्थिति में नहीं हूं।"

नेशनल कांफ्रेंस के सदस्य हसनैन मसूदी ने सदन में भावुक अपील करते हुए कहा कि फारूक अब्दुल्ला ऐहतियाती हिरासत में हैं, न कि न्यायिक हिरासत में और यह स्पीकर के आदेश से खत्म कि जा सकता है। मसूदी ने कहा- 'फारूक साहब श्रीनगर का प्रतिनिधित्व करते हैं और श्रीनगर के 20 लाख लोगों का यह अधिकार है कि सदन में उनकी आवाज सुनी जाए। मेरे पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि वह न्यायिक हिरासत में नहीं हैं। वह ऐहतियाती हिरासत में हैं। आपका (स्पीकर) एक आदेश इसे खत्म कर सकता है।" कुछ इसी तररह की बात तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने भी व्यक्ति किए।

पिछले सत्र में गृह मंत्री ने सही कहा था : स्पीकर

इस बीच, स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि पिछले सत्र में गृह मंत्री अमित शाह ने जब सदन को सूचित किया था कि अब्दुल्ला हिरासत में नहीं हैं तो वह सही थे। लोकसभा सचिवालय को अब्दुल्ला के हिरासत में होने की लिखित सूचना बाद में मिली थी। उन्होंने कहा कि अब उनके पास लिखित सूचना है कि अब्दुल्ला हिरासत में हैं।

स्पीकर करें हस्तक्षेप : बालू

द्रमुक नेता टीआर बालू ने इस मामले में स्पीकर ओम बिरला से हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि स्पीकर सदन के कस्टोडियन हैं और उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सदस्य सदन की कार्यवाही में हिस्सा ले सकें। बालू ने कहा- 'फारूक के साथ जो हुआ है, वह अवैध है... आप इस सदन के कस्टोडियन हैं... आपको हस्तक्षेप करना चाहिए।"

द्रमुक नेता ने कहा कि ऐसा ही मामला पीडीपी नेता तथा जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के साथ है। महबूबा की बेटी ने कहा है कि पीडीपी नेता के साथ बदसलूकी भी हुई है।

Posted By: Navodit Saktawat

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