बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में अस्पताल की ओर से एक वृद्ध कोरोना मरीज को मृत घोषित किए जाने के एक हफ्ते बाद वह घर लौट आए। इतना ही नहीं जब वह घर लौटे तो उनके श्राद्ध की तैयारी चल रही थी। बिराटी के रहने वाले 75 साल के शिवदास बंद्योपाध्याय को कोरोना संक्रमित होने पर 11 नवंबर को बारासात के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दो दिन बाद उनके परिवार के सदस्यों को उनके निधन की खबर दी गई। प्रोटोकाल के मुताबिक शव को प्लास्टिक की एक थैली में रखा गया था और दूर से परिवार के सदस्यों को दिखाया गया, जिसकी वजह से वे चेहरे को स्पष्ट रूप से नहीं देख सके। मृतक के बेटे ने कहा कि हमने शव का अंतिम संस्कार किया और श्राद्ध के लिए तैयार थे। तभी हमें फोन आया। किसी ने बताया कि हमारे पिताजी ठीक हो गए हैं और हमें उन्हें अस्पताल से घर लाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था करनी चाहिए। यह सुनकर हम हैरान हो गए। हम नहीं जानते कि हमने किसका अंतिम संस्कार किया है। जब पूछताछ की गई कि स्वास्थ्य विभाग से पता चला कि एक बुजुर्ग कोरोना रोगी की 13 नवंबर को मृत्यु हो गई थी। वे खड़दह के रहने वाले थे। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया है। जिला स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कहा गया कि गलती करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस बीच भाजपा के बंगाल अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि ऐसी घटनाएं केवल बंगाल में ही हो सकती हैं। राज्य सरकार कोरोना से मरने वालों की संख्या कम दिखाने के लिए कम जांच कर रही है। पड़ोसी राज्य बिहार, ओडिशा और यूपी में रोजाना एक लाख से अधिक परीक्षण हो रहे हैं जबकि बंगाल में 45,000 परीक्षण ही हो रहे हैं। क्योंकि सरकार तथ्यों को दबाना चाहती है। अगर बंगाल में रोज एक लाख से अधिक जांच हों तो 20,000 से अधिक नए मामले आएंगे। ममता सरकार को लोगों के जीवन के साथ खेलने का कोई अधिकार नहीं है।

Posted By: Navodit Saktawat

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