नई दिल्ली। लगातार व्यक्तिगत निशाना साध रहे विपक्ष और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सूद समेत वापस कर दिया। लगभग डेढ़ घंटे के भाषण में उन्होंने तथ्य भी रखे, अपील भी की, आइना भी दिखाया और तंज कसते हुए इसका अहसास कराने की भी कोशिश की कि राजनीति ठीक है लेकिन ओछी राजनीति से देश का नुकसान हो रहा है।

हालांकि मोदी ने इसका भी पूरा ध्यान रखा कि अन्य विपक्षी दलों को कांग्रेस से अलग रखें। लिहाजा दूसरे विपक्षी दलों के नेताओं की प्रशंसा करने से भी नहीं चूके। सही मायने में मोदी ने राजनेता की तरह सबको साथ आकर लोकतंत्र को बढ़ाने की बात भी की और फिर एक कुशल राजनीतिज्ञ की तरह यह भी याद दिलाने से नहीं चूके कि कांग्रेस नकारी जा चुकी है और अब संसद में उसका विरोध केवल हीन भावना के कारण हो रहा है।

समझ का मारा और जवाबदेही से परे

सामने बैठे कांग्रेस नेताओं की बेचैनी और चुप्पी के बीच मोदी संसद में पहली बार राहुल पर इतने आक्रामक थे। परोक्ष तंज करते हुए उन्होंने कहा- 'कई लोगों की उम्र तो बढ़ती है लेकिन समझ नहीं बढ़ती है।' उन्होंने आगे एक वक्तव्य के बाद कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को संबोधित किया और कहा- 'आपको तो समझ आ जाएगा लेकिन कुछ लोगों को बहुत देर से बात समझ में आती है।' सत्तापक्ष से ठठाकर हंसने की आवाज आई तो कांग्रेस में चुप्पी थी।

प्रधानमंत्री ने आगे जोड़ा

'सार्वजनिक जीवन में हम सभी जवाबदेह होते हैं, किसी भी सवाल पूछने का हक है लेकिन कुछ लोग हैं जिनसे सवाल नहीं पूछा जाता है.किसी को हिम्मत ही नहीं है।' इसी क्रम में उन्होंने स्टालिन और श्चेव की कहानी सुनाई और कहा कि स्टालिन के जमाने मे तो किसी को आवाज उठाने की हिम्मत नहीं थी। माना जा रहा है कि इसी बहाने उन्होंने परोक्ष रूप से इंदिरा के जमाने की याद भी दिलाई और यह भी संकेत दे दिया कि मोदी काल में तो कुछ लोग सरेआम उनका भी समर्थन कर रहे हैं जिन पर देशद्रोह का आरोप है।

पर उपदेश कुशल बहुतेरे: राहुल का नाम लिए बगैर मोदी ने कहा कि मुझे बहुत उपदेश दिए जाते हैं, लगातार आरोप लगाए जाते हैं। मैं ने पिछले कई वर्षो में बहुत कुछ सीखा है लेकिन उन्हें कौन समझाएगा जिन्होंने मनमोहन सरकार कैबिनेट के फैसले की प्रति को सार्वजनिक रूप से फाड़ दिया था। क्या यह आचरण होना चाहिए।

इंदिरा और राजीव की दिलाई याद

यूं तो मोदी का रिसर्च अक्सर सटीक होता है, गुरुवार को कांग्रेस के ही 'हीरो' को खड़ाकर उन्होंने कांग्रेस को चित कर दिया। एक के बाद एक पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से लेकर इंदिरा और राजीव गांधी तक के कई भाषणों का अंश पढ़ते हुए उन्होंने यह याद दिलाया कि हर किसी ने विकास से जुड़े विधेयकों के आड़े आने से बचने की सलाह दी थी। नेहरू ने तो सांसदों को यह भी अहसास कराया था कि संसद में सदस्यों का आचरण इतिहास बनाता है। तो राजीव गांधी ने संसद को सुचारू रखने की बात कही थी। मोदी ने जब इन नेताओं का नाम लिया तो कई बार सोनिया गांधी अपने पीछे बैठे सदस्यों से कुछ पूछती नजर आईं।

अफसरशाही के भरोसे नहीं छोड़ सकते

प्रधानमंत्री ने कहा कि -' तू-तू, मैं-मैं के लिए कई अवसर आते हैं। हमारी सोच अलग हो सकती है.लेकिन विकास से जुड़े मुद्दों पर भी हम लड़ते रहे तो नौकरशाही की मौज होगी। हमें हमारा कर्तव्य और जवाबदेही समझनी चाहिए।' लोगों का विश्वास जीतना होगा। यही वह जगह है जहां विश्वसनीयता तय होती है।

काम का तरीका और मंशा अहम

राष्ट्रपति अभिभाषण पर चर्चा के दौरान कांग्रेस की ओर से कई नेताओं ने याद दिलाया था कि मोदी सरकार संप्रग के ही कामों के लिए अपनी पीठ थपथपा रही है। मोदी ने उसका भी जवाब दिया। उन्होंने कहा- कांग्रेस की चिंता यह है कि जो वह नहीं कर पाए वह मोदी सरकार कैसे कर रही है। भारत-बंग्लादेश सीमा का विवाद तब खत्म हुआ जब राजग सरकार ने फैसला लिया। मनरेगा कांग्रेस के काल में भ्रष्टाचार का अखाड़ा बन गया था लेकिन अब वह ठीक हो गया है। संप्रग काल मे सालाना औसतन 14 सौ किलोमीटर रेल लाइन बिछाई गई लेकिन राजग ने उन्हीं कर्मचारियों के साथ औसतन 23 सौ किलोमीटर रेललाइन बिछाई।

प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान ही कांग्रेस के एक सांसद ने आरोप लगाया कि आप जो कहते है वह करते नहीं है तो मोदी ने तत्काल उनके आरोपों को स्वीकार करते हुए तंज किया- '14 सालों से मुझे कई सर्टिफिकेट दिए जा रहे हैं, एक सर्टिफिकेट और सही।' मोदी ने सामने बैठे खड़गे को कहा- आपकी सरकार खाद्य सुरक्षा के लिए बहुत पीठ थपथपा रही थी लेकिन कांग्रेस शासित चार राज्यों में यह अभी तक लागू नहीं हो पाया। राजग सरकार ने एक अप्रैल से फसल बीमा लागू करने का फैसला लिया है और वह सभी राज्यों में लागू होगा।

गरीबी मिटाए नहीं मिटती

उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस ने एक काम ऐसा छोड़ा है जो बहुत मुश्किल है। मुझे लगता था कि वह भी ठीक हो जाएगा लेकिन जब मैं यहां आया तो पता चला कि इसकी जड़ इतनी गहरी है कि काम आसान नहीं है।

संसदीय अवरोध के लिए हीन भावना दोषी

सरकार कांग्रेस को बाकी विपक्ष से अलग रखना चाहती है। लिहाजा मोदी ने अपने भाषण में यह दीवार भी खड़ी की। उन्होंने कहा- विपक्ष में कई सदस्य बहुत होनहार हैं। वह सदन में नई बातें रखते हैं। लेकिन कुछ लोगों पर हीन भावना इतनी हावी है कि वह दूसरों को आगे आने नहीं देना चाहते हैं।

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