नई दिल्ली, ब्‍यूरो। सरकार रेल और सड़क परिवहन दोनों ही क्षेत्रों में बायो डीजल के उपयोग को बढ़ावा देगी। इसके संकेत यहां बायो डीजल पर आयोजित सम्मेलन में दिए गए। सम्मेलन में ग्रामीण विकास, जहाजरानी तथा सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने वाहनों में बायो डीजल के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए नीति में बदलाव लाने की बात कही। गडकरी के मुताबिक बायो डीजल संयंत्र लगाने के लिए बंजर जमीन के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। रेलमंत्री सदानंद गौड़ा का कहना था कि रेलवे अपने 4,000 डीजल इंजनों में पांच फीसद बायो डीजल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल करेगी।

गडकरी ने कहा बायो डीजल के उपयोग को बढ़ावा देकर न केवल पेट्रोलियम बिल में कमी की जा सकती है, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। बंजर जमीन पर खाद्य व अखाद्य तेलों की खेती करने तथा इनसे बायो डीजल बनाने के प्लांट लगाने के लिए सरकार एक नीति बना रही है। इस संबंध में एक नोट तैयार किया गया है। इसे जल्द ही कैबिनेट के विचारार्थ प्रस्तुत किया जाएगा।

गडकरी के मुताबिक मोटर वाहनों में बायो डीजल के इस्तेमाल के लिए भी नीति में संशोधन किया जाएगा। मौजूदा नीति के तहत वाहनों में बायो डीजल के उपयोग की इजाजत नहीं है, फलस्वरूप देश में बनने वाले बायो डीजल का निर्यात हो रहा है। बायो डीजल को बढ़ावा देने के लिए बिजली, रेलवे, पेट्रोलियम मंत्रालयों के साथ भी चर्चा की जाएगी। कारों में भी बायो डीजल के इस्तेमाल के लिए नियमों में आवश्यक बदलाव किया जा रहा है।

बायो डीजल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार 2013 तक विश्‍व में करीब दो करोड़ बीस लाख टन बायो डीजल की खपत हो रही थी। भारत में यह खपत सिर्फ 11 लाख टन थी। फिलहाल देश में 1,200 करोड़ रुपये के निवेश से सालाना 12 लाख टन बायो डीजल उत्पादन की क्षमता तैयार हो चुकी है। एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप चतुर्वेदी ने कहा कि देश में दवाओं, सौंदर्य प्रसाधनों की सीधे बिक्री की अनुमति है, मगर बड़े ग्राहकों को स्वच्छ ईंधन बेचने पर कई तरह की पाबंदियां लगी हुई हैं।

इससे पहले सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए रेलमंत्री सदानंद गौड़ा ने कहा कि भारतीय रेल अपने 4,000 इंजनों में बायो डीजल का उपयोग करेगी। इसके लिए डीजल में पांच फीसद बायो डीजल का मिश्रण किया जाएगा। रेलवे सालाना कम से कम 15 हजार करोड़ रुपये के डीजल का उपयोग करता है। इसमें जरा सी कमी से भी सैकड़ों करोड़ बचेंगे। पर्यावरण भी स्वच्छ होगा। बायो डीजल में डीजल की अपेक्षा कम कार्बन उत्सर्जन होता है। इसके लिए लोकोमोटिव के डिजाइन में भी बदलाव नहीं करना पड़ता।

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