BSF Powers Row : बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने के फैसले को लेकर बवाल शुरु हो गया है। पंजाब और पश्चिम बंगाल सरकार ने गृहमंत्रालय के इस प्रावधान पर सख्त एतराज जताया है। पंजाब सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर के दायरे में BSF को अधिकार देने के केंद्र के कदम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे संघवाद पर हमला करार दिया है। मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को टैग करते हुए ट्वीट किया, कि मैं बीएसएफ को अतिरिक्त अधिकार देने के भारत सरकार के एकतरफा फैसले की कड़ी निंदा करता हूं, जो संघवाद पर सीधा हमला है। वहीं, बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने गुरुवार को कहा कि यह राज्य के अधिकारों का अतिक्रमण और देश के संघीय ढांचे पर हमला है।

क्या था फैसला?

आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) कानून में संशोधन कर इसे पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में अंतरराष्ट्रीय सीमा से, 50 किलोमीटर के क्षेत्र में तलाशी लेने, जब्ती करने और गिरफ्तार करने की शक्ति दे दी है। इससे पहले ये अधिकार 15 किलोमीटर के दायरे तक ही सीमित था। वहीं, पाकिस्तान की सीमा से लगते गुजरात के क्षेत्रों में यह दायरा 80 किलोमीटर से घटाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया है। जबकि राजस्थान में पहले से ही 50 किलोमीटर तक की सीमा थी, जिसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संबंध में 11 अक्टूबर को अधिसूचना जारी की।

बीएसएफ अधिनियम में नया संशोधन BSF को किसी भी ऐसे व्यक्ति को पकड़ने का अधिकार प्रदान करेगा जिसने इन कानूनों के तहत अपराध किया होगा। आदेश के मुताबिक सीमा सुरक्षा बल मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय तथा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पूरे क्षेत्र में इन शक्तियों का प्रयोग करना जारी रखेंगे।

संघवाद पर चोट?

पंजाब के गृहमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि केंद्र ने अमृतसर बटाला और अमृतसर तक का इलाका बीएसएफ को दे दिया है। प्रधानमंत्री मोदी से अपील है इसे मंजूर न किया जाए। पंजाबियों को शक की नजर से क्यों देख रहा है केंद्र? उन्होंने कहा कि यह संघीय ढांचे पर सीधी चोट है। तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि हम इस फैसले का विरोध करते हैं, यह राज्य के अधिकारों में अतिक्रमण है। राज्य सरकार को सूचित किए बिना बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र में विस्तार करने की तुरंत क्या जरूरत पड़ी? यह संघीय ढांचे पर हमला है।

उधर, बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष अधीर चौधरी ने चेतावनी दी कि केंद्रीय गृह मंत्रालय को इस कदम के दुष्परिणामों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में सीमा से 50 किलोमीटर तक बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र में विस्तार करना राज्यों के क्षेत्र में खुलेआम उल्लंघन करना है। गृह मंत्रालय को राज्यों के अधिकार के साथ कोई छेड़खानी नहीं करनी चाहिए।

केंद्र का क्या है जवाब?

इस मामले पर केंद्र सरकार का कहना है कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा का है और इसलिए इस पर बहस अनावश्यक है। उनके मुताबिक दुश्मन देश द्वारा ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा था, और भारत के लिए बीएसएफ को सशक्त बनाना महत्वपूर्ण था। एक वरिष्ठ बीएसएफ अधिकारी ने बताया कि हम राज्य पुलिस के साथ काम करना जारी रखेंगे, जैसा कि हम अभी कर रहे हैं। हमारे अधिकारक्षेत्र को बढ़ाया जा रहा है, उनके अधिकारक्षेत्र में कटौती नहीं की जा रही है। इसके अलावा, हम केवल किसी को गिरफ्तार कर सकते हैं, मुकदमा चलाने का काम राज्य पुलिस को करना होता है।

क्यों लिया गया ये फैसला?

अधिकारियों के मुताबिक पंजाब में ड्रग्स और हथियारों की तस्करी की समस्या है, तो असम और पश्चिम बंगाल में मवेशी और नकली मुद्रा की तस्करी के रूप में नई चुनौतियां हैं। इस अधिसूचना का एकमात्र उद्देश्य बीएसएफ की परिचालन दक्षता में सुधार करना और तस्करी रैकेट पर नकेल कसने में उनकी मदद करना है।

Posted By: Shailendra Kumar