मदन मोहन सिंह, प्रयागराज। त्रिवेणी की पुण्यप्रद धारा में जनसमुद्र की डुबकी। किनारे रेत से बने छोटे-छोटे शिव। जल, धूप-दीप, धतूरे से अभिषेक और ओम नमः शिवाय के साथ बड़ी-बड़ी मनोकामना। कुछ ऐसे ही दृश्य महाशिवरात्रि पर कुंभ में संगम किनारे भोर से सांझ तक उभरते रहे। और इस तरह अमृत छलकाने वाला कुंभ जगत कल्याण के लिए विष पीने वाले भगवान नीलकंठ को प्रणाम करता हुआ संपूर्णता को प्राप्त हुआ।

कुंभ में इस बार 50 दिनों में छह स्नान तिथियां थीं। तीन शाही स्नान-मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी। दो पर्व स्नान-पौष पूर्णिमा, माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि। माना जा रहा था कि महाशिवरात्रि पर कुछ लाख श्रद्धालु जुटेंगे, लेकिन इस अनुमान को खारिज करते हुए एक करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया।

संगम तट और त्रिवेणी मार्ग पर भीड़ का दबाव इतना बढ़ा कि हालात बमुश्किल से संभले। शहर से संगम की ओर रुख करने का सिलसिला तो रविवार शाम से ही शुरू हो गया था। रात में बारिश और उसके बाद बढ़ी ठंड से बेफिक्र लोग श्रद्धा की ऊष्मा के साथ आगे बढ़ते रहे, पुण्य की डुबकी लगाते रहे। सोमवार को दिन निकलने के साथ ही संगम अपने निखार पर आ गया।

जिधर-जहां तक नजर जाती, श्रद्धालु ही श्रद्धालु। वातावरण पर महाशिवरात्रि का प्रभाव ज्यादा था। कहीं नंदी की पूजा तो कहीं रेत से 11 शिवलिंग का निर्माण कर पूजा। स्वच्छता कार्यकर्ता आते और शिवलिंग पर चढ़े फल-फूल, बिल्वपत्र को समेट ले जाते। फिर नए श्रद्धालु पूजा के लिए हाजिर मिलते-हर हर महादेव की गूंज के साथ। माथे पर छाप-तिलक ऐसे कि श्रद्धालु शिव स्वरूप नजर आ रहे थे। अन्य स्नान तिथियों की तरह इस बार भी देश-दुनिया के लोग जुटे थे।

पारंपरिक परिधान में सजे राजस्थान के श्रद्धालु भीड़ के रंग को चटख बना रहे थे। महाराष्ट्र और गुजरात से आने वाले लोगों की संख्या उल्लेखनीय रही। मां को स्नान कराने नागपुर से आए निशाकांत का कहना था 'रैन बसेरे के लिए लंबी परेड की थकान कुंभ की भव्यता ने उतार दी। पहली बार किसी कुंभ में आया हूं। इतना बड़ा, इतना व्यवस्थित आयोजन पहले कभी नहीं देखा। श्रद्धा का यह स्वरूप हमेशा बने रहना चाहिए'। ऐसा मानना सिर्फ निशाकांत का नहीं है। कुंभ आने वाले हर शख्स की कामना है-श्रद्धा का यह सनातन स्वरूप यूं ही निखरता-उभरता रहे और साक्षी बने 2022 में हरिद्वार का कुंभ भी।

पहली बार महाशिवरात्रि पर इतनी भीड़

कुंभ में महाशिवरात्रि पर पहली बार इतनी भीड़ संगम पर उमड़ी है। यह कहना है 1982 से कुंभ करा रहे देवराज मिश्रा का। वर्तमान कुंभ के स्टोर इंचार्ज देवराज अब तक सात कुंभ और अर्द्धकुंभ में ड्यूटी कर चुके हैं। इसके अलावा 28 माघ मेला में भी ड्यूटी कर चुके हैं। इस बार महाशिवरात्रि की भीड़ देख उन्होंने कहा कि वैसे तो वसंत पंचमी के बाद कुंभ लगभग खत्म हो जाता है, मगर इस बार वसंत पंचमी के बाद भी अपार भीड़ उमड़ी।

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