संजय मिश्र, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी वाड्रा के रुप में 2019 का का सबसे बड़ा सियासी दांव चलने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अब कुंभ के दौरान प्रयागराज के पवित्र संगम में डुबकी लगाएंगे।

पार्टी सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी वसंत पंचमी के मौके पर 10 या 11 फरवरी को संगम में पवित्र स्नान के साथ पूजा-अर्चना करेंगे। देश के सियासी दिग्गजों का लोकसभा चुनाव से पहले कुंभ मेले में शरीक होने के अपने राजनीतिक मायने हैं। सियासी अभियानों से पहले मंदिरों के दर्शन और तीर्थयात्रा वैसे बीते कुछ अर्से से राहुल के दौरों का हिस्सा बन गया है।

भाजपा इसे राहुल गांधी का 'नरम हिन्दुत्व' दांव बता वार भी करती रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी कुंभ मेले में कुछ साधु-संतों आशीर्वाद भी ले सकते हैं। राहुल के मंदिर और धार्मिक कार्यक्रमों को भाजपा बहुसंख्यक समुदाय में कांग्रेस की नकारात्मक हुई छवि को दुरूस्त करने का प्रयास बताती रही है। जबकि कांग्रेस इसे राहुल की निजी धार्मिक आस्था बताते हुए आरोप को खारिज करती रही है। इसीलिए कुंभ में राहुल के जाने को भी कांग्रेस सियासी रंग नहीं देना चाहती और तभी कार्यक्रम की रूपरेखा को गुप्त रखा गया है।

राहुल गांधी के कुंभ स्नान को सियासत से जोड़े जाने की बात पर कांग्रेस के एक वरिष्ठ रणनीतिकार ने कहा कि विरोधी चाहे जो कहें मगर सच्चाई यह है कि धार्मिक आस्था नेहरू-गांधी परिवार की पुरानी परंपरा रही है। उनके मुताबिक प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी से लेकर सोनिया गांधी तक सभी ने कई मौकों पर कुंभ में डुबकी लगाई है।

कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर सोनिया गांधी ने 2001 में विपक्ष में रहते हुए तो 2013 में यूपीए की सत्ता के दौरान दो महाकुंभ में संगम तट पर स्नान किया। इसीलिए राहुल के कुंभ स्नान में सियासत पढ़ना उचित नहीं होगा। कांग्रेस रणनीतिकार कुंभ के धार्मिक आयोजन में राहुल के शामिल होने को चाहे सियासत से अलग करने की कोशिश करें मगर पांच राज्यों के चुनाव के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष के हर बड़े मंदिरों के दर्शन और पूजा-पाठ की खूब चर्चाएं हुईं।

धार्मिक आस्था का सवाल इतना गरमाया कि भाजपा ने राहुल गांधी के गोत्र को लेकर भी सवाल ठोक डाले। इसी तरह गुजरात के विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल के सोमनाथ मंदिर में जाने पर भाजपा ने जब हमला किया तो कांग्रेस ने उन्हें जनेऊधारी ब्राह्माण बताते हुए पलटवार किया।

राहुल गांधी की कैलाश मानसरोवर की पिछले वर्ष हुई पवित्र यात्रा के दौरान भी भाजपा की ओर से उनकी यात्रा पर संदेह जताने से लेकर आस्था तक पर तीखे तीर चलाए गए। ऐसे में लोकसभा चुनाव के मौसम में प्रस्तावित कुंभ का राहुल का धार्मिक स्नान भी सियासी छाया से मुक्त रहेगा इसकी गुंजाइश नहीं दिखती।

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