चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि अफसरों की तैनाती मेरा अधिकार क्षेत्र, फैसला नहीं बदलूंगा। दरअसल, कैप्टन ने स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) में एडीजीपी हरप्रीत सिंह सिद्धू को दोबारा नियुक्ति किया था। बताया गया कि इस फैसले से प्रदेश के कई पुलिस अधिकारी खुश नहीं है। जब सीएम को यह बात पता चला कि उन्होंने साफ-साफ कह दिया कि जो अधिकारी उनके फैसले से सहमत नहीं हैं वे पंजाब छोड़कर केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर जा सकते हैं।

बता दें, पंजाब का गृह विभाग भी अमरिंदर सिंह के पास ही है। पंजाब में यह सभी जानते हैं कि हरप्रीत सिद्धू का मौजूदा डीजीपी दिनकर गुप्ता के साथ रिश्ता मधुर नहीं है। जब गुप्ता इंटेजिलेंस चीफ थे तो सिद्धू ने इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह को ड्रग तस्करी में पकड़ा था जिसके जरिए मोगा के पूर्व एसएसपी राजजीत सिंह पर हाथ डाला।

सिद्धू की इस कार्रवाई से पुलिस दोफाड़ होती नजर आई। STF बनी तो उसकी जवाबदेही सीधे मुख्यमंत्री को थी, लेकिन बाद में उसे DGP के अधीन कर दिया गया। पुलिस विभाग में गुटबाजी न बढ़े, इसलिए सीएम ने सख्त चेतावनी दी है। संपत्ति सार्वजनिक करने की बात की थी हरप्रीत सिद्धू ने कई पुलिस अधिकारियों की जायदादें भी सार्वजनिक करने की बात कही थी। इसके चलते उन्हें STF से हटाकर मुख्यमंत्री कार्यालय में स्पेशल चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी लगाया गया जिसको लेकर वह खासे निराश थे।

अब जब उन्हें फिर से एसटीएफ की कमान सौंपी गई तो कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस पर नाराजगी व्यक्त की। बताते हैं कि सिद्धू के STF चीफ से हटने के बाद पुलिस कर्मचारियों में नशे की बिक्री को लेकर बना डर खत्म हो गया था। इसलिए सिद्धू को एसटीएफ की कमान दी गई है। कोट पंजाब से नशा खत्म करना मेरी प्राथमिकता है। केंद्र से नेशनल ड्रग पॉलिसी बनाने के लिए भी कहा है। पंजाब सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण यहां सीमा पार से नशा तस्करी होती है।