देश में कोरोना संक्रमण बेकाबू है। दूसरी लहर के चलते हालात बेहद नाजुक है। मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। राज्य सरकारें अपनी नाकाम व्यवस्था से बचने के लिए मृतकों की आंकड़े छुपा रहे हैं। बिहार में इस तरह सामने आए मामले के बाद पंजाब में भी मौत के आंकड़े छिपाए जा रहे हैं। प्रदेश में कोरोना प्रोटोकाल से अंतिम संस्कार और मौत के सरकारी आंकड़े में लगभग 50 फीसद का अंतर सामने आया है।

जालंधर के श्मशान घाटों में एक मई से 10 जून तक 635 शवों का अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकाल से किया गया, जबकि सरकारी आंकड़े के मुताबिक इन 41 दिनों में सिर्फ 340 लोगों की ही कोविड से मौत हुई। इनमें से 550 अंतिम संस्कार तो सिर्फ मई में ही हुए, जबकि प्रशासन के रिकॉर्ड में 288 मौतें ही दर्ज हैं। जून में अब तक 85 लोगों का अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकाल से किया गया है। सरकारी रिकार्ड में सिर्फ 52 मौतें दर्ज हैं।

इसी तरह लुधियाना में स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मई में कोरोना के कारण 624 और जून में 54 लोगों की मौत हुई है। वहीं श्मशान घाटों पर मई में 1,116 और जून में 113 शवों का अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकाल के तहत किया गया। वहीं जालंधर में स्वास्थ्य विभाग के नोडल अफसर डॉक्टर टीपी सिंह ने कहा कि इलाज के दौरान मौत होने जैसे मामलों में अंतिम संस्कार के समय कोरोना प्रोटोकाल का पालन किया जाता है। मृत्यु प्रमाणपत्र में में कोरोना नहीं लिखा जाता। राज्य के नोडल अधिकारी डॉक्टर राजेश भास्कर ने कहा कि जिन लोगों का अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकाल के तहत किया गया है, उन्हें भी कोरोना मृत्यु में ही दर्ज किया गया है। आंकड़े नहीं बदले जाएंगे।

Posted By: Shailendra Kumar

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