India China Tension: भारत और चीन के बीच तनाव जारी है और चीन को बड़ा सबक सिखाते हुए भारत सरकार ने 59 चीनी मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसक बीच एक बड़ी खबर आ रही है कि चीन के साथ पूर्वी लद्दाख में LAC पर जारी तनातनी के बीच अत्याधुनिक Rafale Fighter Jet जुलाई महीने में भारत आ रहे हैं। राफेल की पहली खेप को लेकर पहले जानकारी आई थी कि यह जल्द भारत आ सकती है और अब खबर आई है कि यह जुलाई महीने में आ जाएगी। पहली खेप में फ्रांस से 6 राफेल जेट आएंगे जिन्हें अंबाला के एयरबेस पर लाया जाएगा।

चीन से LAC पर जारी तनाव के बीच किसी भी स्थिति में राफेल भारतीय सेना की ताकत में बड़ा इजाफा करेगा। बता दें कि राफेल जेट चीन के सबसे उन्नत फायटर जेट Chengdu J-20 पर भी भारी पड़ता है। ताजा हालातों को देखते हुए सरकार इसे जल्द ही भारतीय वायुसेना के युद्धक बेड़े में जल्द ही आपरेशन के लिए शामिल कर लिया जाएगा। राफेल के आने के बाद जाहिर तौर पर वायुसेना की मारक क्षमता में इजाफा होगा। लद्दाख में तनातनी के बाद से ही भारतीय वायुसेना चीन से लगी सीमाओं पर हाई अलर्ट मोड में है और इस समय राफेल जैसे विमान स्वाभाविक रूप से वायुसेना के मनोबल में भी कई गुना इजाफा करेगा।

इस दिन आएंगे 6 राफेल

जानकार सूत्रों के अनुसार 6 राफेल जेट्स की पहली खेप में चार विमानों के 27 जुलाई तक अंबाला एयरफोर्स बेस पर आने की पूरी संभावना है। वहीं दो विमान कुछ अंतराल के बाद आएंगे। फ्रांस के रक्षामंत्री ने गत 2 जून को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को फोन कर आश्वस्त किया था कि कोरोना महामारी की चुनौतियों के बावजूद राफेल की डिलेवरी में देरी नहीं होगी।

एक बार रुकने के बाद पहुंचेंगे अंबाला

भारत आने वाले राफेल जेट फ्रांस से उड़ान भरने के बाद पहले सऊदी अरब पहुंचेंगे और एक दिन के विश्राम के बाद वहां से अंबाला लाए जाएंगे। चीन के साथ ताजा सैन्य चुनौतियों को देखते हुए माना जा रहा है कि भारत आने के बाद Rafale Jet को अपने युद्धक बेड़े में आपरेशन के लिए तैयार करने में भारतीय वायुसेना को बहुत ज्यादा वक्त नहीं लगेगा क्योंकि भारत आ रहा राफेल जेट पूरी तरह अस्त्र-शस्त्र से लैस होगा। इसमें मेटियोर और बीवीआर सरीखे मिसाइल भी शामिल हैं जिनके जरिए अपनी वायुसीमा क्षेत्र में रहते हुए भी राफेल 100 किलोमीटर से अधिक दूरी से ही दुश्मन को निशाना बना सकता है।

मई में मिलनी थी खेप

भारत और फ्रांस के बीच हुए राफेल जेट खरीद सौदे 2016 के अनुसार भारत को राफेल विमानों की पहली खेप मई 2020 में मिलनी थी। कोरोना महामारी के कारण दुनिया भर में हुए लॉकडाउन के चलते डिलेवरी अवधि में मामूली बदलाव हुआ है।

चीन के अति उन्नत फाइटर जेट चेंगदू-जे-20 पर बहुत भारी

खास बात यह कि राफेल विमान चीन के सबसे उन्नत लड़ाकू विमान चेंगदू-जे-20 से बहुत बेहतर है। चीन का यह लड़ाकू विमान बड़े आकार के कारण पिछले हिस्से से राडार की पकड़ में आ जाता है जबकि राफेल के साथ ऐसा नहीं होता है। मारक क्षमता में भी चेंगदू-जे-20 से राफेल बहुत बेहतर है।

चेंगदू-जे-20 विमान चीन का पांचवी पीढ़ी का स्टील्थ विमान है। चीन की रक्षा एजेंसियां द्वारा विकसित इस विमान ने पहली उड़ान 2011 में भरी थी। 2017 में इसे वायुसेना में शामिल किया गया था। 2018 में इसकी कांबैट यूनिट बनाई गई थी। कई तकनीकी खामियों के कारण पश्चिम देशों के पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों से कमतर है।

वहीं राफेल भी पांचवी पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है। इसमें लगाई गई मिसाइल ज्यादा मारक क्षमता वाली हैं। इसका बेहतरीन राडार सिस्टम 200 किमी के दायरे में निगरानी रख सकता है। इसके अलावा इसकी बहुत सी खूबियां इसे अपने प्रतिद्वंद्वी से बहुत आगे रखती हैं।

Posted By: Ajay Kumar Barve

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